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हाथरस : स्वतंत्रता सेनानियों के साथ स्टेशन लूटा, आजादी के लिए जेल भी गए

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स्वतंत्रता संग्राम सेनानी सुनहरी लाल आजाद। - फोटो : SHAPHU
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मुकेश बाबू शर्मा, सहपऊ।
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कस्बा ने कई स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को जन्म दिया है, जिन्होंने देश को आजाद कराने के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया। आजादी की लड़ाई में जेल गए, अर्थदंड भुगता लेकिन हौसले कभी नहीं डिगे। ऐसे ही एक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे सुनहरी लाल आजाद। सुनहरी लाल ने कांग्रेस के करो या मरो आंदोलन के समय स्वतंत्रता सेनानियों के साथ मिलकर दिल्ली-हावड़ा रेल लाइन स्थित चमरौला बरहन स्टेशन को लूट लिया। इसके लिए अंग्रेजों ने उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
कांग्रेस के वर्तमान नगर अध्यक्ष और सुनहरी लाल के सबसे छोटे पुत्र वीरेंद्र कुमार जैसवाल बताते हैं कि उनके पिताजी को उनके दादा रिक्खी जैसवाल से देश को स्वतंत्र कराने की प्रेरणा मिली थी। रिक्खी जैसवाल एवं पंडित आनंदी लाल शर्मा आपस में दोस्त थे। दोनों ही नेहरू एवं गांधीजी के भाषणों से प्रेरित होकर देश को स्वतंत्र कराने के कार्य में लग गए।
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वे जेल भी गए। लेकिन पुराने समय में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को बेंत मारने की सजा सुना कर रिहा कर दिया जाता था। रिक्खी लाल जैसवाल ने अपने पांचों पुत्रों को स्वतंत्रता संग्राम में शामिल होने के लिए प्रेरित किया। पांचों भाइयों ने मिलकर देश को स्वतंत्र कराने में अपनी भूमिका निभाई। इनमें से तीसरे नंबर के पुत्र सुनहरी लाल आजाद ने अपनी अग्रणी भूमिका निभाई।
शुरू से ही स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय थे सुनहरी लाल
वह शुरू से ही कांग्रेस द्वारा चला जा रहे स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन में कूद पड़े और सर्वप्रथम सन 1942 में कांग्रेस द्वारा चलाए जा रहे करो अथवा मरो आंदोलन के तहत अपने साथियों के साथ मिलकर दिल्ली हावड़ा रेल लाइन पर स्थित चमरौला बरहन स्टेशन को लूट लिया।
अंग्रेजों ने उनको साथियों के साथ वहीं गिरफ्तार कर लिया और जेल भेज दिया। कांग्रेस ने जब अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन शुरू किया उसी दौरान उस आंदोलन को मजबूत तथा ठोस दिशा देने के लिए जवाहर लाल नेहरू ने कस्बा के रामलीला मैदान में एक विशाल जनसभा को संबोधित किया। इस सभा को उस समय के युवा सुनहरी लाल जैसवाल को संबोधन करने का मौका मिला।
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उनके संबोधन को सुनकर नेहरू ने उन्हें आजाद की उपाधि प्रदान की थी। सन 2003 में उनका निधन हो गया। आजाद के तीन पुत्र हुए जिनमें से दो अध्यापक पद से सेवानिवृत्त हैं। मझले पुत्र पोस्ट ऑफिस से सेवानिवृत्त हुए हैं। छोटे पुत्र वीरेंद्र जैसवाल कांग्रेस नगर अध्यक्ष हैं और अध्यापक पद से सेवानिवृत्त होने के बाद समाजसेवा में लगे हुए है। संवाद
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