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हाथरस : देश भर में हाथरस के बने पालनों में झूलेंगे लड्डू गोपाल

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गोपाल जी के सिंहासन व पालना बनाते कारीगर। संवाद - फोटो : HATHRAS
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संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस। बृज में जन्माष्टमी पर्व का काफी महत्व है। शहर में ठाकुरजी की बंशी, झूला और पालना बनाने का काम जोरों पर चल रहा है। भगवान बालकृष्ण को झुलाने के लिए शहर में कई स्थानों पर पीतल, एल्यूमीनियम के झूले बनना शुरू हो गए हैं। इन झूलों की मांग देशभर में है।
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हाथरस में निर्मित झूले में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर लड्डू गोपाल को झुलाया जाता है। शहर के मोहल्ला गली बंदरवन, होली वाली गली, चमन गली, गणेशगंज, अटल टाल रोड सहित कई इलाके हैं, जहां कांस्यकार समाज के लोग अपने घरों में यह काम करते हैं। लोग खुद कारीगर हैं। मदद के लिए मजदूरों को लगाते हैं।
भगवान श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व 18 अगस्त को मनाया जाएगा। इस बार कोरोना नहीं है। लिहाजा इस बार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार पूरे जोश के साथ मनाने की तैयारी चल रही है। जन्माष्टमी के लिए इन आयटमों की मांग बढ़ी है। निर्माता भी ऑर्डर के अनुरूप माल की आपूर्ति करने में जुट गए हैं।
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देशभर में रहती है झूलों की मांग
हाथरस में बने झूलों की मांग देशभर में रहती है। इन झूलों का निर्माण पीतल व एल्यूमीनियम की धातु को ढालकर तैयार किया जाता है। ढलाई के दौरान ही झूले व स्टैंड को आकर्षक रूप दिया जाता है। झूलों पर बेहतरीन नक्काशी भी की जा रही है। हाथरस में बन रहीं एल्यूमीनियम की गायों की भी काफी मांग रहती है। यहां से सबसे ज्यादा माल मथुरा और वृंदावन और हरिद्वार के लिए भेजा जा रहा है।
कोरोना महामारी के चलते बीते दो साल से यह कारोबार बहुत धीमी गति से चल रहा था। अब चूंकि इस बार कोरोना नहीं है, इसलिए कारोबारियों और निर्माताओं को माल के खूब ऑर्डर मिल रहे हैं। ऑर्डर के हिसाब से माल की आपूर्ति देशभर में की जा रही है। कारोबारी इस साल जन्माष्टमी के मौके पर बाजार में अच्छा कारोबार होने की उम्मीद कर रहे हैं।
बोले उद्यमी
हाथरस में निर्मित पीतल के लड्डू गोपाल प्रदेश के विभिन्न जिलों के अलावा गुजरात और महाराष्ट्र तक जाते हैं। इनकी सबसे ज्यादा मांग मथुरा में रहती है। बाजार में 50 रुपये से लेकर दो हजार रुपये तक के लड्डूू गोपाल ऑर्डर पर तैयार किए जा रहे हैं।
- निवेदन वर्मा, उद्यमी
हम पिछले करीब 23 साल से यह कारोबार कर रहे हैं। हाथ के बने झूलों की भव्यता के साथ सजाया जाता है। ठाकुर जी के लिए छोटी चौकी भी बनवाते हैं। वजन के हिसाब से भी झूले बनाए जाते हैं। एल्युमीनियम झूलों की मांग अधिक रहती है।
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-यश, उद्यमी
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