हाथरस। हाथरस-सिकंदराराऊ रोड पर सलेमपुर औद्योगिक क्षेत्र में अब 567 एकड़ भूमि पर उद्यमियों को अब जगह दी जाएगी। भूमि उपलब्ध कराने के लिए ले आउट तैयार कर शासन को भेज दिया गया है। इसके लिए 73 उद्यमियों ने आवेदन भी कर दिया है। जमीन के आवंटन के बाद उद्यमियों द्वारा इकाई की स्थापना की जाएगी। इससे जिले के उद्योग रफ्तार पकड़ेंगे। निवेश का ग्राफ भी बढ़ना तय है। साथ ही औद्योगिक क्षेत्र में प्रदूषण का भी ध्यान रखा जा रहा है। इसके लिए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के इंतजाम भी किए ।
उल्लेखनीय है कि जिले में शहर के अलावा सलेमपुर, बिसावर, कचौरा आदि स्थानों पर औद्योगिक इकाइयां संचालित हो रही हैं। हाथरस में हींग, रेडीमेड गारमेंट्स, आयुर्वेदिक दवा, नमकीन, अचार मुरब्बा आदि इकाइयां संचालित हो रही हैं। हींग व रेडीमेड गारमेंट्स ओडीओपी में शामिल होने के बाद इस उद्योग की इकाइयों की संख्या में इजाफा हुआ है।
अब उद्यमी अपनी इकाइयों को विस्तार देने की तैयारी में जुटे हैं। पूर्व डीएम के साथ उद्यमियों की बैठक भी हुई थी। सलेमपुर में पहले से ही औद्योगिक क्षेत्र विकसित है। अब इस औद्योगिक क्षेत्र को विस्तारित करने की कोशिशें शुरू हो गई हैं। वर्तमान में वहां करीब 35 फैक्टरियां वहां हैं। कुछ का निर्माण चल रहा है तो कुछ संचालित हो रही है। संवाद
जरूरत के हिसाब से होगा भूमि का आवंटन
सलेमपुर में 567 एकड़ भूमि पर शासन का एक औद्योगिक संस्थान से विवाद चल रहा था। यह न्यायालय से शासन के पक्ष में आ गया है। अधिकारियों का कहना है कि यहां 100 से अधिक औद्योगिक इकाइयां लगाई जा सकती हैं। इसके लिए 73 उद्यमियों ने भूमि के लिए आवेदन किया है। जरूरत के हिसाब से भूमि उद्यमियों को आवंटित की जाएगी। इस पर वह अपना उद्योग लगा सकते हैं। इसके लिए शासन को लेआउट तैयार कर भी भेज दिया गया है। उद्योगों के संचालन के साथ प्रदूषण रोकने के लिए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की भी व्यवस्था होगी।
सलेमपुर में 567 एकड़ भूमि पर एक कंपनी से विवाद चल रहा था। निर्णय शासन के पक्ष में आया है। यह भूमि अब उद्यमियों को आवंटित की जाएगी। इसके लिए 73 लोगों ने आवेदन किया है। इसका लेआउट तैयार कर शासन को भेजा गया है।
-अजिलेश कुमार, उपायुक्त जिला उद्योग केंद्र
मोहन मीकिन को आवंटित की गई थी यह भूमि
हाथरस। सलेमपुर औद्योगिक क्षेत्र 1978 में बसाया गया। यह सिकंदराराऊ रोड पर हाथरस से 18 किमी की दूरी पर बसा है। जब यह औद्योगिक क्षेत्र बसाया गया था तब मोहन मीकिन समूह को भी भूमि का आवंटन किया गया था। शासन ने इस समूह को नियत समय में उद्योग लगाने के लिए कहा था, लेकिन समूह ने नियत समय में उद्योग नहीं लगाया तो शासन ने यह आवंटन निरस्त कर दिया। इसके विरुद्ध यह समूह पहले हाईकोर्ट में गया। वहां समूह को हाईकोर्ट में केस हार गया और फिर सुप्रीम कोर्ट में भी केस हार गया। तब से अब तक इस भूमि पर कोई उद्योग नहीं लगा है। वहां अब 567 एकड़ भूमि फिर से यूपीएसआईडीसी को मिल गई है। इस भूमि के लिए नए उद्योग लगाने के लिए प्रस्ताव मांगे जा रहे हैं। संवाद