न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
नगर निकाय चुनाव को लेकर विभिन्न राजनीतिक दल तो जोर-शोर से तैयारी कर ही रहे हैं, लेकिन इस चुनाव में निर्दलीय भी दमखम दिखाते रहे हैं। पिछले चुनाव में ही जिले की तीन नगर पंचायतों के अध्यक्ष पद पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने दलीय प्रत्याशियों को हरा दिया था। इतना ही नहीं हाथरस नगर पालिका में भी कई निर्दलीय ने दलीय उम्मीदवारों का खेल बिगाड़ दिया था। हालांकि अभी तक आरक्षण पर अंतिम मुहर नहीं लगी है, लेकिन यह भी तय है कि कुछ राजनेता चुनाव लड़ने की हसरतें पाले हुए हैं। यदि इन्हें टिकट नहीं मिला तो वह निर्दलीय चुनाव लड़ सकते हैं और दलीय प्रत्याशियों का गणित बिगाड़ सकते हैं। इसे लेकर प्रमुख राजनीतिक दल भी चौकन्ने हैं।
नगर निकाय चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी भी शानदार प्रदर्शन करते रहे हैं। जिले में दो नगर पालिका हाथरस और सिकंदराराऊ के अलावा सात नगर पंचायतें मेंडू, पुरदिलनगर, हसायन, सादाबाद, सहपऊ, सासनी और सादाबाद हैं। बात यदि पिछले चुनाव की करें तो वर्ष 2017 के चुनाव में मेंडू, पुरदिलनगर और सहपऊ में निर्दलीय प्रत्याशी जीते थे। इन तीनों नगर पंचायतों पर दलीय उम्मीदवार हार गए थे। सहपऊ नगर पंचायत में तो निर्दलीय विपिन ने भाजपा के धीरज को पराजित किया था। वहीं मेंडू में निर्दलीय मनोहर सिंह ने बसपा के धनपति सिंह को हराया था। इसी प्रकार पुरदिलनगर में निर्दलीय नाजमा बेगम ने बसपा की कैलाशी देवी को शिकस्त दी थी। सहपऊ नगर पंचायत में अध्यक्ष पद पर तो हमेशा निर्दलीय उम्मीदवार का ही कब्जा रहा है।
हाथरस नगर पालिकाध्यक्ष पद के चुनाव में पिछली बार भाजपा के आशीष शर्मा जीते थे और दूसरे स्थान पर बसपा की रितु उपाध्याय रही थीं। इस चुनाव में निर्दलीय रवि चौहान ने 4383 वोट पाए थे और वह कांग्रेस व रालोद के प्रत्याशियों से आगे रहे थे। नगर पंचायत में भी कई सीटों पर निर्दलीय प्रत्याशियों के वोट दलीय प्रत्याशियों से ज्यादा आए थे। हालांकि अभी सबकी निगाह आरक्षण पर लगी हैं और यह तय नहीं है कि कौन सी सीट किस वर्ग के लिए आरक्षित होगी, लेकिन यह तय माना ज रहा है कि निर्दलीय प्रत्याशी इस बार भी जोर-आजमाइश कराएंगे। संवाद