न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
शीतलहर का प्रकोप बच्चों की सेहत पर भारी पड़ रहा है। वह निमोनिया के शिकार होने लगे हैं। जिला अस्पताल व महिला जिला अस्पताल में रोजाना 25 से 28 बच्चे जांच व इलाज के लिए लाए जा रहे हैं। इनमें कुछ बच्चे निमोनिया पीड़ित भी निकल रहे हैं, जिन्हें भर्ती कर उनका इलाज दिया जा रहा है।
जिला अस्पताल के बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) में सर्दी से पीड़ित बच्चों को अभिभावक लेकर पहुंच रहे हैं। नवजात शिशुओं को महिला अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड के डॉक्टर के पास लेकर उपचार के लिए पहुंच रहे हैं।
यहां 30 से 40 बच्चे आ रहे हैं। एसएनसीयू वार्ड में भी भर्ती कर निमोनिया पीड़ित बच्चों का इलाज किया जा रहा है। शहर के निजी अस्पतालों में रोजाना कम से कम 10 बच्चों को इलाज के लिए भर्ती किया जा रहा है। ऐसे में बच्चों की अच्छे से देखरेख जरूरी हो गई है। संवाद
बच्चों के शरीर का सामान्य तापमान 36.5 डिग्री रहना चाहिए। अगर शरीर का तापमान इससे अधिक या कम रहता है तो बच्चों को बुखार, दर्द, खांसी व सांस लेने में तकलीफ होने लगती है, जिससे वह निमोनिया से ग्रसित हो जाते हैं। एसएनसीयू वार्ड इन-दिनों फुल चल रहा है। यहां भर्ती बच्चों में से कुछ निमोनिया से पीड़ित भी हैं। सभी बच्चों को भर्ती कर इलाज दिया जाता है।
-डॉ. अनूप शर्मा, बाल रोग विशेषज्ञ एसएनसीयू।
जन्मजात परेशानी से बार-बार होता है निमोनिया
जिला महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. शैली सिंह ने बताया कि बच्चों को निमोनिया बैक्टीरिया और वायरस के संक्रमण से होता है। कुछ बच्चों में जन्मजात कुछ परेशानियों की वजह से बार-बार निमोनिया की समस्या होती है। सर्दियों के मौसम में इन्फेक्शन की वजह से बच्चों को सबसे ज्यादा निमोनिया होता है। इस बीमारी से बचाव के लिए एहतियात के तौर पर उचित सामान्य स्वच्छता बनाए रखनी चाहिए और गर्भवती महिलाएं आने वाले बच्चे में इस बीमारी के जोखिम को कम करने के लिए खुद को टीका लगवा सकती हैं।
श्वसन तंत्र को प्रभावित करता है निमोनिया
निमोनिया श्वसन तंत्र को प्रभावित करता है। यह पूरे श्वसन पथ या इसके किसी विशिष्ट भाग जैसे फेफड़े आदि को प्रभावित कर सकता है। यह मूल रूप से श्वसन पथ का सूजन है, जो माइक्रोबियल संक्रमण के कारण होता है। हालांकि, प्रदूषण, रसायन और कई अन्य चीजें भी सूजन का कारण बन सकते हैं। निमोनिया पांच साल से कम उम्र के बच्चों में सबसे आम बीमारियों में से एक हैं।
निमोनिया के लक्षण
- बच्चे को 102 डिग्री से अधिक बुखार होना।
- बच्चों के शरीर में कंपन व मांसपेशियों में दर्द होना।
- फेफड़े से गीला श्लेष्म कफ के रूप में निकलना।
- छाती और पेट में दर्द होने की शिकायत रहना।
- रात में ठीक से सो नहीं पाना व कमजोरी होना।
- नाक बहना व गले में घरघराहट की आवाज आना।
- त्वचा विशेष रूप से चेहरा और होंठ नीला पड़ना।
- बच्चे को मितली और उल्टी महसूस होना।
बच्चों में निमोनिया का इलाज
- एंटीबायोटिक की दवाएं ड्रिप के माध्यम से बच्चे की नसों में दी जाती हैं।
- ऑक्सीजन थेरेपी के जरिये बच्चे को पर्याप्त ऑक्सीजन दी जाती है।
- बच्चे को डिहाइड्रेशन की समस्या है तो उसे तरल पदार्थ दिया जाता है।
- फेफड़े से कफ और थूक को निकालने के लिए फिजियोथेरेपी दी जाती है।
निमोनिया से बचने के उपाय
- बच्चे के इम्यून सिस्टम को मजबूत रखने के लिए उसे स्तनपान कराते रहें।
- निमोनिया से बचने के लिए बच्चे को समय-समय पर टीका लगवाते रहें।
- नवजात शिशु को छूने से पहले अपने हाथों को अच्छी तरह से साफ कर लें।
- बच्चे की बोतल और खिलौनों को भी साफ-सुथरा रखें।
- सर्दियों में मां को बच्चे का विशेष ध्यान रखना होता है।
- बच्चे को ऊनी कपड़े पहनाकर सर्द हवाओं से बचाकर रखना चाहिए।
- ज्यादा ठंड होने पर कमरे को गर्म करना चाहिए।
- गंदगी और ठंडे शरीर के साथ बच्चे को नहीं छूना चाहिए।
- नवजात को नियमित तौर पर स्तनपान कराने से निमोनिया का खतरा कम होता है।
- समय पर निमोनिया का टीका लगवाने से भी बच्चे को निमोनिया से बचाया जा सकता है।
मेेरा 25 दिन का बच्चा है। इसे सर्दी की शिकायत हो गई है। उसी की दवा दिलवाने के लिए यहां पर आई हूूं।
-राधा, तीमारदार
मेरे नाती को सर्दी से बुखार आ गया है। उसी को दिखाने के लिए डॉक्टर साहब के पास आई हूं, ताकि वह ठीक हो सके।
-सरला, तीमारदार
मेेरा बच्चा 15 दिन का है। अधिक ठंड होने से वह सर्दी की चपेट में आ गया है। उसी को लेकर यहां पर आई हूं।
-रेनू, तीमारदार
मेरा बच्चा ढाई महीने का है, उसे सर्दी लग गई है। इस कारण वह काफी परेशान है, उसी को दवा दिलवाने के लिए यहां पर आई हूं।
-मिनी, तीमारदार