फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Hathras News: नाम का है स्वास्थ्य केंद्र, डॉक्टर है तो उपकरण नहीं, उपकरण है तो डॉक्टर नहीं

Sat, 14 Jan 2023 07:00 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस

सार

हाथरस के सहपऊ में सीएचसी नाम का ही स्वास्थ्य केंद्र है। यहां डॉक्टर हैं, तो उपकरण नहीं और उपकरण हैं तो डाॅक्टर नहीं। सीएचसी पर समस्याओं का अम्बार लगा हुआ है। जिससे मरीजों को उपचार नहीं, निराशा मिल रही है।
विज्ञापन
सहपऊ स्थित सीएचसी - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

सहपऊ स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सीएचसी केवल दो ही चिकित्सकों के भरोसे पर चल रहा है। इनमें एक प्रभारी चिकित्साधिकारी भी शामिल हैं। वह अक्सर बैठकों में व्यस्त रहते हैं। बचे हुए एक चिकित्सक की ड्यूटी यदि रात में लग गई, तो सुबह संविदा अथवा आयुष चिकित्सक को ही मरीज देखने पड़ते हैं। दवाओं के नाम पर केवल कप सीरफ, दवा की गोलियां एवं कैप्सूल ही मिलते हैं।

विज्ञापन


जिन लोगों के शरीर में पानी की कमी पाई जाती है, उनको ग्लूकोज की बोतल भी चढ़ाई जाती है। महीने में ऐसे एक या दो मरीज ही आते हैं। पानी की कमी की समस्या गर्मियों के दिनों में अधिक मिलती है। कुत्ता काटने के इंजेक्शन एंटी रेबीज वैक्सीन (एआरवी) की कमी तो हमेशा ही रहती है।

जिला मुख्याल से आवंटन मिलने के बाद आठ दिन से पहले ही एआरवी समाप्त हो जाती हैं। कस्बा में पहले पीएचसी था। अब करीब 10 वर्ष पहले इसी मैदान पर सीएचसी बनकर तैयार हो गया है। इमारत काफी अच्छी है। उसमें चिकित्सा के विभिन्न उपकरणों के लिए अलग-अलग कमरे भी तैयार किए गए हैं, लेकिन उपकरणों के नाम पर सब शून्य है।
विज्ञापन


सीएचसी पर एक्सरे और अल्ट्रासाउंड मशीन भी नहीं है। ऑपरेशन थिएटर है, लेकिन कोई सर्जन नहीं है। संविदा पर एएनएम कार्यरत हैं और गर्भवती महिलाओं का प्रसव भी कराया जाता है, लेकिन कोई महिला विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं है। दंत चिकित्सा के उपकरण तो हैं, लेकिन इसके लिए भी कोई चिकित्सक नहीं है।

यहां तक कि गंभीर रोगियों के लिए यह सीएचसी रेफर सेंटर बनकर रह गया है। दुर्घटना में घायल व्यक्ति को यहां केवल प्राथमिक चिकित्सा ही उपलब्ध कराई जाती है और उसके बाद उसे रेफर कर दिया जाता है। जांच के लिए प्रयोगशाला है, लेकिन उसके लिए तकनीकी सहायक नहीं है। महज एक सहायक से काम चलाया जा रहा है। वह भी अब सेवानिवृत्ति के कगार पर हैं। आंख, कान, नाक और गले के लिए भी कोई डॉक्टर नहीं हैं।

बच्चे को सर्दी, जुकाम और दस्त हो गए थे। दवा लेने आई हूं। काफी देर बाद चिकित्सक आए हैं। दवा तो मिल गई। देखो उससे कुछ लाभ होता है अथवा नहीं। - ईशा देवी, नगला सुखराम
मुझे सर्दी हो गई है और मामूली बुखार भी है। यहां आने पर डॉक्टर का इंतजार करना पड़ा। दवा ले ली है, उससे ठीक होता हूं तो आगे दवा लेने आऊंगा, वरना निजी चिकित्सक को दिखाऊंगा। - गौरव शर्मा, गुतहरा
शुक्रवार की सुबह बंदर ने काट लिया था। उसके लिए एआरवी लगाने आया हूं। खुदा का शुक्र है कि एआरवी मिल गई, वरना बाजार से महंगी वैक्सीन खरीदकर लगवानी पड़ती। - माजिद अहमद, सहपऊ
मेरे घुटनों में कई दिनों से दर्द रहता है। डॉक्टर ने दवा तो दे दी है। उससे कितना फायदा होता है, यह तो उसे खाने के बाद ही पता चलेगा। यहां विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध नहीं हैं। -शशिकांत शर्मा, सहपऊ
सीएचसी पर दवा की कोई कमी नहीं है। विभाग एवं सरकार द्वारा जो सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, उन्हें हम मरीजों को उपलब्ध करा रहे हैं। यह बात सही है कि सीएचसी पर उपकरणों, चिकित्सक और स्टाफ की कमी है। इस बारे में हमने कई बार उच्चाधिकारियों से पत्राचार किया है। - डॉ. दानवीर सिंह, सीएचसी प्रभारी सहपऊ

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें