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हाथरस : देश की आजादी के लिए लाठियां खाई, कई बार गए जेल

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हाथरस : स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बृजपाल सिंह चौहान। संवाद - फोटो : SIKANDHRA RAHU
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सिकंदराराऊ (हाथरस)
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सिकंदराराऊ के बृजपाल सिंह ने आजादी की लड़ाई में हमेशा देश का झंडा बुलंद किया। देश की आजादी के लिए उन्होंने लाठियां खाई। कई बार जेल गए। जेल में महीनों बिताए लेकिन अंग्रेजी हुकूमत के सामने उन्होंने सिर नहीं झुकाए। आजादी मिलने के बाद सरकार ने उन्हें ताम्र पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। 1982 में उनकी मृत्यु हो गई।
ब्रजपाल सिंह चौहान का जन्म 1880 में गांव भटीकरा निवासी पृथ्वी सिंह चौहान के घर हुआ था। दसवीं तक पढ़ाई करने के बाद वे क्षेत्र में घूम-घूम कर अंग्रेज सरकार के खिलाफ प्रचार करते रहे। अनेक लोगों को उन्होंने अपने साथ मिलाकर अंग्रेजों से लोहे लिए। अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ लगातार काम करने के कारण वे उनकी आंख की किरकिरी बन गए। 1941 में एक धरना-प्रदर्शन के दौरान लाठी चार्ज में वे घायल हो गए। अंग्रेजों ने उन्हें गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया।
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अदालत ने उन्हें छह महीने कारावास और 200 रुपये का अर्थदंड की सजा सुनाई। जेल में जाकर भी वे रुके नहीं। इससे तंग आकर उन्हें तंग कोठरी में अकेला डाल दिया गया। जेल में जेलर उनसे झाड़ू लगवाता, बर्तन साफ कराता। जेल से छूटने के बाद वे भूमिगत हो गए। इस दौरान उनकी पत्नी सुखदेवी का निधन हो गया। आजादी के बाद उनके दो बेटे ओमप्रकाश सिंह, ईश्वर प्रकाश सिंह उनकी देखभाल करते रहे। वर्तमान में उनके पौत्र रामकुमार सिंह चौहान सरकार से मिले कोटे की दुकान का संचालन कर रहे हैं। संवाद
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