हाथरस। शहर के किला रेलवे स्टेशन रोड पर राज्य कर्मचारी बीमा (ईएसआई) अस्पताल बंद हो गया है। ऐसे में श्रमिकों के सामने काफी परेशानी है। वह निजी अस्पतालों में महंगा इलाज कराने के लिए मजबूर हैं और इससे उन्हें आर्थिक नुकसान हो रहा है।
जिले में श्रम कार्यालय में करीब 14 हजार श्रमिक पंजीकृत हैं। श्रमिकों को शासन स्तर से लगातार सुविधाएं देने के लिए योजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है। हाथरस प्राचीन औद्योगिक शहर है तो यहां काफी पहले से ईएसआई का अस्पताल था। यह अस्पताल किला रेलवे स्टेशन रोड पर था और किराये के भवन में संचालित था, लेकिन यह भवन जर्जर हो गया तो यह अस्पताल भी बंद हो गया।
इस कारण ईएसआई कार्डधारक श्रमिकों को उपचार के लिए भटकना पड़ता है, जबकि किसी समय यहां सासनी, सादाबाद, हसायन, मुरसान आदि स्थानों से श्रमिक यहां आते थे। यहां दो चिकित्सक व चार कंपाउंडर की तैनाती थी। संवाद
ये सुविधाएं थी ईएसआई अस्पताल में
ईएसआई अस्पताल में दुर्घटना के दौरान मरीज को प्राथमिक उपचार दिया जाता था। टीबी के मरीजों का इलाज किया जाता था। यदि किसी श्रमिक की बीमारी गंभीर होने पर उसे बड़े अस्पताल के लिए रेफर किया जाता था। अब अस्पताल बंद होने के बाद श्रमिक परेशान हैं। उन्हें शुल्क देकर निजी चिकित्सकों की सलाह लेनी पड़ रही है।
ईएसआई अस्पताल बंद हो गया है। इस कारण चिकित्सकीय सविधाओं का लाभ लेने के लिए निजी चिकित्सकों की मदद लेनी पड़ रही है। इस कारण आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है। पहले डिस्पेंसरी से दवाएं मिलती थी। -राजवीर, श्रमिक
ईएसआई की डिस्पेंसरी से पहले छोटी बीमारियों की दवाएं मिल जाती थीं। इससे खर्चा भी कम हो जाता था। अब इलाज के लिए भटकना पड़ रहा है। यहां ईएसआई अस्पताल को फिर से खोला जाए।
-प्रेमचंद्र, श्रमिक
श्रमिकों के हित में ध्यान में रखते हुए ईएसआई की राशि हमारे द्वारा जमा की जा रही है। श्रमिकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए अस्पताल खोला जाए, ताकि जरूरतमंदों को समय से कम पैसे में उपचार मिल सके।
-रामकुमार अग्रवाल, उद्यमी
ईएसआई अस्पताल के लिए जगह की तलाश की जा रही है। जगह मिलने के साथ ईएसआई डिस्पेंसरी को फिर से खोलने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
-रमेशचंद्र, ईएसआई निरीक्षक।