न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सिकंदराराऊ (हाथरस)
सिकंदराराऊ के लोगों को तीन दशक बाद भी बस स्टैंड नहीं मिल सका। आज भी यहां के लोग धूप या बारिश में सड़क पर खड़े होकर बसों का इंतजार करते हैं। बस स्टैंड की जमीन के लिए कई बार सर्वे भी कराया गया लेकिन कानूनी अड़चन की वजह से जगह फाइनल नहीं हो सका।
1990 तक नगर में पालिका के पास पुराना बस स्टैंड चल रहा था। धीरे-धीरे उसकी जमीन पर कब्जा हो गया। जगह की कमी के कारण बस स्टैंड खत्म हो गया। अब लोग पुराने बस स्टैंड के सामने जीटी रोड पर तथा पंत चौराहे पर खड़े होकर बसों का इंतजार करते हैं। अधिकांश बसें बस स्टैंड में न जाकर आठ किमी पहले ही बाईपास पर उतारती है। इससे लोगों को अतिरिक्त पैसा खर्च कर शहर में पहुंचना पड़ रहा है।
बसपा शासनकाल में पूर्व ऊर्जा मंत्री रामवीर उपाध्याय ने इसके लिए प्रयास किए थे। महामई सलावतनगर की भूमि का चयन किया गया लेकिन उसमें कानूनी पेच फंस गया। अगर राज्य परिवहन निगम को यह जमीन लेनी है तो उसे इसके लिए 96 लाख रुपये ग्राम सभा को देने होंगे। संवाद
- निगम चाहे तो 96 लाख रुपया देकर ग्राम सभा की जगह ले सकती है। इसके पास ही एनएच- 91 का बाईपास होगा। इसके चलते हर बस स्टैंड में आएगी। स्टैंड तक आने के लिए टिर्री, टेंपो व अन्य वाहन भी उपलब्ध हो जाएंगे। - उदय पुंढीर, समाजसेवी
- बस स्टैंड क्षेत्र की आवश्यकता है। इसके न होने से बच्चों, महिलाओं में खुली धूप, बारिश में बसो पर चढ़ना उतरता पड़ता है। देर रात्रि में वीराने में होकर आना जाना पड़ता है। - मनोज पंडित, बसपा नेता
- आखिर कब तक जनता सब्र करेगी। ऐसा तो नहीं है कि बस स्टैंड बनने से जनता को ही फायदा होगा। फायदा राज्य परिवहन निगम को भी होगा। उसका राजस्व बढ़ जाएगा। - नरेंद्र सिंह चौहान, भाजपा नेता
- भाजपा की सरकार में जनता के हित के काम कम हो रहे हैं। जिले में बैठे अधिकारी चाहे तो जगह का इंतजाम हो सकता है। नगला जलाल तथा महामई सलावतनगर ग्राम सभा की जमीन सिकंदराराऊ देहात में आती है। - रामेश्वर यादव, जिला पंचायत सदस्य