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हाथरस : कर्ज से परेशान युवक मोबाइल कंपनी के टावर पर चढ़ा, छह घंटे बाद उतारा

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हाथरस : पुलिस अधिकारियों के समझाने पर टावर से उतरता युवक। संवाद - फोटो : SHAPHU
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहपऊ (हाथरस)।
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क्षेत्र के गांव महरारा में कर्ज में डूबा युवक गांव के पास लगे जीओ कंपनी के टावर पर चढ़ गया। युवक अपने साथ फांसी लगाने के लिए रस्सी भी लेकर चढ़ा था। युवक का कहना था कि ग्रामीण बैंक ऑफ आयावर्त में हुई 70 लाख रुपये की हेराफेरी के मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपियों को तो क्लीन चिट दे दी, लेकिन उसे जेल भेज दिया। युवक उस समय बैंक बीसी का काम करता था। पुलिस अधिकारियों और परिजनों ने उसे काफी समझाया, लेकिन वह नीचे उतरने के लिए तैयार नहीं हुआ। करीब छह घंटे की मशक्कत के बाद दोपहर 2.25 बजे सीओ सादाबाद और तहसीलदार ने मांगों पर कार्रवाई करने का आश्वासन देकर युवक को टंकी से नीचे उतारा।
गांव महरारा निवासी राजपाल कुशवाहा पुत्र भूप सिंह कुशवाहा पर करीब 10 लाख रुपये का बैंक और निजी कर्जदाताओं का कर्जा था। कर्ज वापसी का कहीं से कोई इंतजाम नहीं होता देख बुधवार की सुबह करीब साढ़े आठ बजे वह गांव के पास लगे जीओ कंपनी के टावर पर चढ़ गया और आत्महत्या करने की धमकी देने लगा। युवक अपने साथ फांसी लगाने के लिए रस्सी भी लेकर गया था। उल्लेखनीय है मई 2019 मई में जलेसर रोड स्थित ग्रामीण बैंक ऑफ आयावर्त में खातेदारों के खातों से लगभग 70 लाख रुपये की हेराफेरी हुई थी। इसकी जानकारी जब उन खातेदारों को हुई, जिनके खातों से रकम निकाली गई थी तो उन्होंने कई दिनों तक बैंक के आगे धरना-प्रदर्शन किया था और बैंक के उच्चाधिकारियों से भी शिकायत कीं।
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जब तक उच्चाधिकारियों ने इस मामले को संज्ञान में लिया, तब तक बैंक प्रबंधक और कैशियर बैंक छोड़कर भाग गए। उच्चाधिकारियों ने जिन खातेदारों के पास बैंक मेें धनराशि जमा करने की पर्ची मिली, उनको पैसे वापस कर दिए। जिनके पास बैंक में धनराशि जमा करने का कोई सबूत नहीं था, उनको निराश होना पड़ा। इस मामले में चार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया। उस समय यह युवक जलेसर रोड स्थित इस बैंक में बीसी का काम करता था। पुलिस ने प्रबंधक और कैशियर को क्लीन चिट दे दी। दोनों ने फिर से अपने पदों पर कार्य करना शुरू कर दिया, लेकिन बैंक ने उनको जलेसर रोड के स्थान पर दूसरी जगह तैनात कर दिया।
इस युवक ने जलेसर रोड से कस्बा सहपऊ में कॉस्मेटिक की दुकान खोल ली। इस दौरान कोविड 19 के कारण दुकानें दो साल तक बंद रहीं। युवक के पिता की पहले ही मौत हो चुकी थी। पुलिस ने 28 जून 2020 को राजपाल को पकड़कर जेल भेज दिया। जेल से आने के बाद उसकी मां और उसको भरण-पोषण के लाले पड़ गए। दुकान चलाने के लिए उसने कुछ लोगों से कर्ज लिया।
उसका कहना था कि पुलिस ने बैंक में खातेदारों की जमा धनराशि का गबन करने वाले मुख्य आरोपियों को छोड़ दिया और उसे दोषी करार देते हुए जेल भेज दिया, जबकि वह केवल बीसी का कार्य करता था। उसके खिलाफ न्यायालय में मुकदमा विचाराधीन है। पुलिस ने उसके साथ अन्याय किया है। अब बैंक के कर्ज के साथ उसने जिन लोगों से रुपया उधार लिया था, वह भी वापस करना है। आखिर वह क्या करें। टावर से उतरने के बाद इस युवक को सीओ एवं तहसीलदार ने काफी समझाया और कहा कि वह न्यायालय में चल रहे मुकदमे के लिए न्यायालय में पुन: विवेचना के एक याचिका दायर करें, जिससे इस मामले की दोबारा जांच हो सके।
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कर्ज के कारण युवक काफी मानसिक तनाव में था। उसे काफी समझाने के बाद टावर से उतारा गया। उसकी समस्याओं का समाधान करने का आश्वासन दिया गया है। अब वह शांत है।
-रुचि गुप्ता, सीओ सादाबाद
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