हाथरस। जिले में महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में महिलाओं की भागीदारी के दावों का दम निकल रहा है। मनरेगा के तहत होने वाले कार्यों में महिलाओं की भागीदारी लक्ष्य के सापेक्ष 21 फीसदी है। शासन की ओर से मनेरगा के तहत होने वाले कार्यों में महिलाओं की 33 फीसदी भागीदारी का लक्ष्य निर्धारित है। जिले में वर्तमान में 463 ग्राम पंचायतों के सापेक्ष 77 ग्राम पंचायतों में महिला मेट ही कार्यरत हैं, जबकि जिले में 145 ग्राम पंचायतों में महिला मेट तैनात हैं।
मनरेगा के तहत ग्रामीणों को अपने ही गांव में रोजगार उपलब्ध कराने के लिए जॉब कार्ड बनाकर काम मुुहैया कराया जाता है, जिससे ग्रामीण को गांव को छोड़कर शहर व अन्य जिलों की तरफ न जाएं। मनरेगा में महिलाओं को सशक्त बनाए जाने के लिए 33 फीसदी भागीदारी का लक्ष्य तय किया गया है। जिले की प्रत्येक ग्राम पंचायत में महिला मेट की भर्ती किए जाने के भी निर्देश जारी किए गए हैं।
जिले में मनरेगा में महिलाओं को काम दिए जाने के मामले में पीछे हैं। लक्ष्य के सापेक्ष जिले में महज 21 फीसदी महिलाओं को ही मनरेगा में रोजगार मिल पा रहा है। विकास खंड सहपऊ और मुरसान महिलाओं को मनरेगा के तहत काम देने सबसे निचले पायदान पर हैं। इसे लेकर डीएम रमेश रंजन की ओर से लगातार समीक्षा भी की जा रही है। संवाद
मनरेगा में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाने के लिए संबंधित अधिकारियों को समय-समय पर निर्देश जारी किए जाते हैं। मनरेगा के कार्यों की लगातार समीक्षा की जा रही है। मनरेगा के कार्यों में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई भी की जा रही है।
-रमेश रंजन, जिलाधिकारी हाथरस