न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सिकंदराराऊ (हाथरस)।
नगर के मोहल्ला बारहसैनी में शनिवार की सुबह करीब साढ़े सात बजे केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की टीम ने डॉ. स्वामी शरण गुप्ता के आवास पर छापा मारा। टीम ने घर के अंदर घुसते ही परिवार के सभी सदस्यों को एक कमरे में बैठा दिया। इसके बाद डॉ. स्वामी प्रसाद गुप्ता के पुत्र पंकज गुप्ता के मोबाइल फोन और लैपटॉप को कब्जे में लेकर उसे खंगालना शुरू कर दिया। यह ज्ञात हुआ कि सीबीआई ने चाइल्ड पोर्नोग्राफी के खिलाफ यह कार्रवाई की है। देर शाम समाचार लिखे जाने तक छापे की कार्रवाई जारी थी।
घर में काफी देर तक पड़ताल करने के बाद सीबीआई की टीम पंकज गुप्ता की पत्नी प्रीति को लेकर डॉ. स्वामी शरण गुप्ता के जीटी रोड स्थित क्लीनिक पर गई। यहां सीबीआई ने उनके क्लीनिक और दवा की दुकान की काफी देर तक तलाशी ली। वहां से कुछ कागजात अपने साथ लेकर वापस आई। इसके थोड़ी-थोड़ी देर बाद लगातार दो बार सीबीआई की टीम जीटी रोड स्थित उनके क्लीनिक और दवा की दुकान पर गई और वहां तलाशी ली।
तलाशी के दौरान दोनों दुकानों के शटर गिरा दिए गए। इसके पश्चात सीबीआई ने मोहल्ले में आकर घर को अंदर से बंद कर लिया। यह टीम लगातार लैपटॉप और मोबाइल फोन को खंगालने में जुटी रही। टीम के साथ हाथरस रोड स्थित बैंक ऑफ इंडिया के शाखा प्रबंधक रहे विकास शर्मा भी थे।
वह वर्तमान में फर्रुखाबाद जिले के कायमगंज में तैनात हैं। हालांकि सीबीआई की टीम ने किसी भी तरह की जानकारी नहीं दी लेकिन उनके साथ अंदर रहे एक पुलिसकर्मी ने अपना नाम न बताने की शर्त पर बताया कि मामला चाइल्ड पोर्नोग्राफी की जांच से जुड़ा है। इन साइटों से जो कमाई हुई है, उसमें उक्त बैंक प्रबंधक की भी मिलीभगत का शक है। संवाद
बाहर से मंगाकर खाया नाश्ता और खाना
सुबह यहां आने के बाद टीम के अधिकारियों ने पुलिसकर्मियों से मंगवाकर नाश्ता किया और दोपहर में होटल से मंगाकर खाना खाया। घर में खाना भी नहीं बनने दिया गया। घर से निकलकर जाने के दौरान मीडिया कर्मियों ने सीबीआई टीम के सदस्यों से बात करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।
कार्रवाई को लेकर फैलती रहीं अफवाहें
सीबीआई के छापे की सूचना मिलते ही काफी भीड़ मोहल्ला बारहसैनी के इर्द-गिर्द जमा हो गई। दिन भर में कई अफवाहें फैलीं, लेकिन शाम होने तक यह पुष्टि हो गई कि यह कार्रवाई चाइल्ड पोर्नोग्राफी को लेकर की गई है। बताया जा रहा है कि यहां से साइट को कॉपी कर सिंगापुर, थाईलैंड और मलेशिया आदि देशों में इंटरनेट के माध्यम से भेजा जाता था और उनके बदले में मोटी रकम वसूली जाती थी।