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हाथरस : संगठन के दम पर चुनाव जीतने की कोशिश में भाजपा

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
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नगर निकाय चुनाव की घोषणा अभी नहीं हुई है और न ही अभी आरक्षण तय हुआ है, लेकिन राजनीतिक दल पुरजोर तरीके से इस चुनाव की तैयारी में जुट गए हैं। हाथरस नगर पालिकाध्यक्ष पद पर इस समय भी भाजपा का ही कब्जा है। ऐसे में भाजपा की कोशिश है कि यह कब्जा बरकरार रहे। इसकेतहत मतदाता सूची में पार्टी अपने समर्थक मतदाताओं के नाम बढ़वाने में जुटी है। पार्टी की यह भी रणनीति है कि नगर पालिका क्षेत्र में जो नए इलाके शामिल हुए हैं, वहां भी संगठन को और मजबूत किया जाए। हर वार्ड में मजबूत प्रत्याशी उतारा जाए।
वैसे भी पार्टी के नेता मान रहे हैं कि जिस तरह देश और प्रदेश में पार्टी की लहर चल रही है तो उसके दम पर उन्हें नगर निकाय चुनाव में आसानी से सफलता मिलेगी। बहरहाल, पार्टी की नजर फिलहाल आरक्षण की घोषणा पर टिकी है, उसके आधार पर ही पार्टी प्रत्याशी तय करेगी।
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बात यदि हाथरस नगर पालिका की करें तो इसके अध्यक्ष पद पर पिछले करीब तीन दशक से भाजपा का ही दबदबा रहा है। वर्ष 2006 में जरूर बसपा के समर्थन से अगम प्रिय सत्संगी ने जीत हासिल की थी, वरना अन्य चुनावों में भाजपा ही हाथरस नगर पालिकाध्यक्ष पद जीतती आई है। नगर पालिका बोर्ड में भी उसके सभासदों का संख्या बल ज्यादा रहा है। पिछले वर्ष 2017 के चुनाव में भी भाजपा के प्रत्याशी आशीष शर्मा ने यह चुनाव बसपा प्रत्याशी रितु उपाध्याय को हराकर जीता था।
नगर निकाय चुनाव की तैयारी में इस बार भी भाजपा सबसे आगे है। भाजपा एक बार फिर अपने मजबूत संगठनात्मक ढांचे के दम पर यह चुनाव जीतना चाहती है। इसके साथ ही पार्टी ने जातीय गुणा-भाग भी लगाना शुरू कर दिया है। पार्टी ने हर बूथ पर अपने पदाधिकारी नियुक्त किए हैं। मतदाता सूची में नाम बढ़वाने तक का जिम्मा सौंप दिया गया है।
बूथ स्तर तक पर लगातार बैठकें की जा रही हैं। पार्टी नगर निकाय चुनाव को लेकर होमवर्क पूरा कर चुकी है। वैसे भी हाथरस विधानसभा सीट पर पिछले दो चुनाव में पार्टी ने काफी वोटों से जीत दर्ज की है। इसमें नगर के मतदाताओं का खासा योगदान रहा है। ऐसे में पार्टी नेता यह मानकर चल रहे हैं कि हाथरस नगर पालिका के अध्यक्ष पद को वह आसानी से जीत लेंगे, अलबत्ता इस बार हाथरस नगर पालिका की सीमा में 11 ग्राम पंचायतें शामिल हुई हैं।
पार्टी का फोकस यहां के मतदाताओं पर है। सूत्रों की मानें तो वहां भी संगठन की मजबूती के साथ पार्टी यह आंकलन कर रही है कि किस वार्ड में किस जाति व वर्ग के मतदाताओं की संख्या ज्यादा है, उसके आधार पर वार्ड में प्रत्याशी उतारा जाए। पार्टी के नेता दावा कर रहे हैं कि पार्टी की राष्ट्रीय स्तर पर जो लहर चल रही है, उसका फायदा निकाय चुनाव में भी मिलेगा। संवाद
आरक्षण तय नहीं, फिर भी भाजपा में सबसे ज्यादा दावेदार
हाथरस। हालांकि अभी निकाय क्षेत्रों का आरक्षण तय नहीं हुआ है, लेकिन सबसे ज्यादा टिकटार्थियों की लाइन भाजपा में ही है। वार्ड से लेकर नगर पालिकाध्यक्ष पद के लिए दावेदार टिकट मांग रहे हैं और इसके लिए गुणा भाग लगा रहे हैं। यह चेहरा चमकाने में लगे हैं। आरक्षण तय नहीं होने के बाद भी अध्यक्ष से लेकर सभासद तक के चुनाव के इच्छुक सबसे ज्यादा भाजपा में ही हैं। यह लगातार बड़े नेताओं की गणेश परिक्रमा कर रहे हैं।
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नगर निकाय चुनाव के लिए हमारी पूरी तैयारी है। हम जिले में सभी सीटें जीतेंगे। बूथ स्तर तक हमारा संगठन काफी मजबूत है। बूथ स्तर तक हमने संयोजक बनाए हैं। पन्ना प्रमुख बनाए हैं। वार्ड संयोजक, वार्ड प्रभारी तक बनाए हैं। निकाय संयोजक तक बनाए गए हैं। चुनाव को लेकर बूथ स्तर तक लगातार बैठकें की जा रही हैं। नई मतदाता सूची हमें मिली हैं और उसके आधार पर हम बूथ अध्यक्ष बनाएंगे। हाथरस नगर पालिका की सीमा विस्तारित हुई है। यहां भी हमारे काफी वोटर हैं। इसका लाभ हमें मिलेगा। अभी आरक्षण घोषित नहीं हुआ है तो दावेदारी भी किसी ने नहीं की है। आरक्षण घोषित होते ही पार्टी उम्मीदवार भी तय कर देगी।
-गौरव आर्य, जिलाध्यक्ष भाजपा
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