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हाथरस : लंपी बीमारी से बचाव के लिए जारी की सलाह

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
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जिले के पशुओं में फैल रहे लंपी नामक त्वचा रोग से बचाव के लिए पशुपालन विभाग ने सलाह जारी की है। विभाग की ओर से ब्लॉक वार सर्विलांस टीम भी बना दी गई हैं। यह टीमें अपने-अपने क्षेत्र में जाकर ग्रामीणों को इस बीमारी के लक्षण व बचाव के बारे में जानकारी दे रही हैं। जिला मुख्यालय पर नियंत्रण कक्ष भी स्थापित कर दिया गया है। पशुपालक नियंत्रण कक्ष के नंबर 05722 226405 पर संपर्क कर सकते हैं।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. सुशील कुमार ने लंपी स्किन डिजीज (एलएसडी) के संबंध में पशुपालकों के लिए सलाह जारी की है। उन्होंने बताया कि लंपी स्किन डिजीज एक विषाणुजनित रोग है। इस रोग में पशु तेज बुखार, आंख व नाक से पानी गिरना, पैरों में सूजन, पूरे शरीर में कठोर एवं चपटी गांठ आदि लक्षण पाए जाते हैं। कभी-कभी संपूर्ण शरीर की चमड़ी विशेष रूप से सिर, गर्दन, थूथन, थनों, गुदा व अंडकोष या योनिमुख के बीच के भागो पर गांठों के उभार बन जाते है। कभी भी पूरा शरीर गांठों से ढक जाता है।
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गंभीर रूप से प्रभावित जानवरों में नैक्रोटिव घाव, श्वसन बौर जठरांत्र में भी विकसित हो जाते हैं। श्वसन पथ में घाव होने से सॅंास लेनेे में कठिनाई होती है। पशुओं का वजन घट जाता है, शरीर कमजोर हो जाता है। गाभिन पशुओं में गर्भपात हो सकता है। दुधारू गायों में दुग्ध उत्पादन काफी कम हो जाता है।
रोग के प्रकोप के समय क्या करें
पशुपालक सबसे पहले पशु चिकित्साधिकारी को सूचित करें। प्रभावित पशु को स्वस्थ पशु से अलग करें। पशुओं को सदैव साफ पानी पिलाए। पशु के दूध को उबाल कर पीएं। पशुओं को मच्छरों, मक्खियों, किलनी आदि से बचाने के लिए पशुओं के शरीर पर कीटनाशक दवाओं का प्रयोग करें। पशुबाडे़ और पशु खलिहान की फिनाइल सोडियम हाइपोक्लोराइट इत्यादि का छिड़काव कर उचित कीटाणु शोधन करें। बीमार पशुओं की देखभाल करने वाले व्यक्ति को भी स्वस्थ पशुओं के बाडे़ से दूर रहना चाहिए। पहले स्वस्थ पशुओं को चारा व पानी दें, फिर बीमार पशुओं को दें।
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रोग के प्रकोप के समय क्या न करें
सामूहिक चराई के लिए अपने पशुओं को न भेजें। पशु मेला एवं प्रदर्शनी में अपने पशुओं को न भेजें। बीमार एवं स्वस्थ पशुओं को एक साथ चारा-पानी न कराएं। प्रभावित क्षेत्रों से पशु खरीद कर न लाएं। यदि किसी पशु की मत्यु होती है तो शव को खुले में न फेंकें।
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