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हाथरस : खुशी में चलाई गई गोली ले लेती है जान, फिर भी नहीं लेते सबक

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
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हर्ष फायरिंग में अक्सर लोगों की जान चली जाती है और खुशी का मातम में बदल जाती है, फिर भी लोग इससे सबक नहीं ले रहे। किंदौली गांव जिस तरह की घटना हुई है, इस जिले में उस तरह की घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं। पुलिस प्रशासन हर बार सख्ती की बात कहता हैं, लेकिन उनके दावों में दम दिखाई नहीं देता।
किंदौली में हुई घटना में एक मासूम की जान चली गई और एक महिला घायल हो गई। इस तरह की घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं। पिछले दिनों मुरसान में हर्ष फायरिंग का वीडियो वायरल हुआ था। गांव बिचपुरी में दो युवकों ने हर्ष फायरिंग की थी। पुलिस ने इस मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया था। दो साल पहले शहर के सिकंदराराऊ रोड स्थित एक गेस्ट हाउस में खुशी में चलाई गई गोली एक वेटर को लगी थी और वह गंभीर रूप से घायल हो गया था।
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गांव लाड़पुर में भी हर्ष फायरिंग की घटना हुई थी। सादाबाद के गांव मई में भी लग्न समारोह में खुशी में की गई हर्ष फायरिंग में एक युवक की जान चली गई थी। सिकंदराराऊ के गांव नूरपुर में भी इसी तरह की घटना हो चुकी है। सासनी के गांव समामई में भी हर्ष फायरिंग में एक बंदूक की नाल फटने से वर्ष 2018 में चार लोग घायल हुए थे और इस दौरान एक महिला की मौत हो गई थी। तीन साल पहले आरएसएस के शस्त्र पूजन कार्यक्रम में भी खुशी में की गई फायरिंग से एक मीडियाकर्मी घायल हुआ था। इसके अलावा कई अन्य घटनाएं हुई हैं। खुशी में चलाई गई गोली से लोगों की जान चली जाती है, लेकिन बार-बार ऐसी घटनाएं होने पर भी लोग सबक नहीं लेते। वहीं पुलिस प्रशासन भी इसे लेकर सख्ती नहीं दिखाता। संवाद
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हर्ष फायरिंग को रोकने के लिए पुलिस ने सख्त कदम उठा रखे हैं। सभी थानों की पुलिस को निर्देश दे रखा है कि वह हर्ष फायरिंग नहीं होने दें। लोगों से भी कहा है कि यदि वह कहीं हर्ष फायरिंग होते देखें तो इसकी सूचना पुलिस को दें, ताकि हर्ष फायरिंग के दौरान होने वाली घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सके।
-देवेश कुमार पांडेय, पुलिस अधीक्षक हाथरस
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