संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस।
जिले की ग्राम पंचायतों में बने सामुदायिक शौचालय के रखरखाव में लापरवाही बरती जा रही है। हैरानी की बात यह है कि जिले में बने सामुदायिक शौचालय के रखरखाव में प्रति माह 38 लाख रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन इस धनराशि को दिए जाने वाला विभाग भी रखरखाव की मॉनीटरिंग नहीं कर रहा है। लाखों रुपये पानी की तरह बहाए जा रहे हैं, लेकिन कोई भी अफसर अपनी जिम्मेदारी तय नहीं कर पा रहा है।
जिले की ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालयों का निर्माण किया गया है। इन सामुदायिक शौचालयों में गांव के सभी लोगों को शौच की सुविधा दी जाती है। जिले की ग्राम पंचायतों में बने प्रत्येक शौचालय पर प्रति माह 9 हजार रुपये रखरखाव पर खर्च किए जाते हैं। रखरखाव करने वाले लोगों को 6 हजार रुपये और सामान के लिए 3 हजार रुपये प्रति माह दिए जाते हैं।
इसके बावजूद ग्राम पंचायतों में बने शौचालयों के ताले तक महीनों तक नहीं खुल पा रहे हैं। धनराशि देने वाला पंचायती राज विभाग इस ओर से अपनी आंखें मूंद कर बैठा हुआ है। वहीं जिले की 431 ग्राम पंचायतों में प्रति माह सामुदायिक शौचालयों के रखरखाव के लिए धनराशि खर्च की जा रही है।
यहां जिले में प्रति माह सामुदायिक शौचालयों के रखरखाव के लिए 38 लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं, इसके बावजूद सामुदायिक शौचालयों का कोई धरोधार नहीं है। जिले में 184 शौचालय की जिम्मेदारी व्यक्तिगत व 247 शौचालयों की जिम्मेदारी स्वयं सहायता समूहों को दी गई है।
- जिले में सामुदायिक शौचालय के रखरखाव की जिम्मेदारी स्वयं सहायता समूहों व व्यक्तिगत लोगों को दी गई है। प्रत्येक शौचालय के रखरखाव पर 9 हजार रुपये खर्च किए जाते हैं। - जीडी जैन, डीपीआरओ