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सियासत में अगर होते तो विधायक बन गए होते...

सार

सम्मेलन में मेंडू की कवियित्री स्नेहा शर्मा की सरस्वती वंदना के बाद भरतपुर के कवि जयकुमार जय ने अपनी रचना, जिससे अपनी एकता जिंदी है, हिंदी हिंद के माथे की बिंदी है, सुनाई। डॉ. प्रदीप गर्ग, डॉ. शरीफ अली, डॉ. अरविंद शर्मा प्राचार्य, शिवेंदु दीक्षित, पृथ्वी सिंह, सत्यप्रकाश पाठक, अशोक शर्मा एडवोकेट, रामकिशन दीक्षित, आदित्य दीक्षित, देवा बघेल, प्रमोद विषधर, सत्यप्रकाश शर्मा सत्य, अमन सक्सेना, मीरा माहेश्वरी, शालिनी गर्ग, मालती गर्ग, सभासद कमलेश शर्मा, शशिवाला वार्ष्णेय, सुशीला चौहान, बब्बी पंडित व मनमोहन शर्मा आदि ने काव्य पाठ किया। विशिष्ट अतिथि के रूप में गिरजाशंकर शर्मा, प्रो. आयुर्वेदा, सतीश चौहान, देवेंद्र राघव, नीरज वैश्य, भानु प्रताप सक्सेना आदि थे।
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कवि सम्मेलन में काव्य पाठ करती कवियत्री। संवाद - फोटो : SIKANDHRA RAHU
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संवाद न्यूज एजेंसी, सिकंदराराऊ।
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हिंदी प्रोत्साहन समिति के बैनर तले शनिवार की रात को नगर के कासगंज रोड स्थित ममता गेस्ट हाउस में हिंदी विचार गोष्ठी और कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। हिंदी के उन्नयन के लिए आंदोलन चलाने पर जोर दिया गया।
शुभारंभ व्यापारी नेता विपिन वार्ष्णेय, उदय पुंढीर, जयपाल सिंह चौहान, आरके सिंह, हरपाल सिंह यादव आदि ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। वक्ताओं ने कहा कि जिन अंग्रेजों ने हम पर दशकों तक अत्याचार किए, उनकी भाषा का प्रयोग करने में हम गर्व का अनुभव कर रहे हैं।
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सम्मेलन में मेंडू की कवियित्री स्नेहा शर्मा की सरस्वती वंदना के बाद भरतपुर के कवि जयकुमार जय ने अपनी रचना, जिससे अपनी एकता जिंदी है, हिंदी हिंद के माथे की बिंदी है, सुनाई। टूंडला के कवि सुबोध सुलभ ने हिंद और हिंदुओं से जिसको नहीं है मोह, वह बांध लें शरीर, वे यहां रह नहीं पाएंगे।
मध्य प्रदेश के भोपाल के कैलाश आदमी ने कविता एक तूफान हो गई, शब्द शब्द मिल गान हो गई, सुनाई। दिल्ली के वरिष्ठ कवि डॉ. जय सिंह आर्य जय ने सिर्फ यही कर पाएगी सब का बेड़ा पार, हाथों में अब थाम लो हिंदी की पतवार, सुनाकर तालियां बटोरीं।
मथुरा के डॉ. रमाशंकर पांडेय ने फिर से गुलामी का शिकंजा कस जाए नहीं, हिंदी को बचाके हिंदुस्तान को बचाइए, सुनाई। एटा के जिरस्मी की कवयित्री सीमा पुंढीर ने हमारी आन है हिंदी, हमारी शान है हिंदी, बसी मिट्टी की खुशबू में हमारी जान है हिंदी, सुनाई।
नोएडा के हास्य व्यंग्य के कवि विनोद पांडेय, ने अगर हम बेचते सपने तो लायक बन गए होते, अदाकारी दिखाते गर तो नायक बन गए होते, यहां वादाखिलाफी पर कहा है बेवफा तुमने, सियासत में अगर होते विधायक बन गए होते, सुनाई।
मेरठ के गीतकार सत्यपाल सत्यम, बलराम सरस, अब्दुल रज्जाक अलीगढ़, विशाल उपाध्याय, कुमारी शांभवी पाठक दर्पण, उन्नति भारद्वाज, स्नेहा शर्मा, डॉ. दत्तात्रेय द्विवेदी आदि ने काव्य पाठ किया। डॉ. प्रदीप गर्ग, डॉ. शरीफ अली, डॉ. अरविंद शर्मा प्राचार्य, शिवेंदु दीक्षित, पृथ्वी सिंह, सत्यप्रकाश पाठक, अशोक शर्मा एडवोकेट, रामकिशन दीक्षित, आदित्य दीक्षित, देवा बघेल, प्रमोद विषधर, सत्यप्रकाश शर्मा सत्य, अमन सक्सेना, मीरा माहेश्वरी, शालिनी गर्ग, मालती गर्ग, सभासद कमलेश शर्मा, शशिवाला वार्ष्णेय, सुशीला चौहान, बब्बी पंडित व मनमोहन शर्मा आदि ने काव्य पाठ किया।
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अध्यक्षता वरिष्ठ समाजसेवी राजेंद्र मोहन सक्सेना ने की और संचालन हिंदी प्रोत्साहन समिति के संस्थापक अध्यक्ष देवेंद्र दीक्षित शूल ने किया। विशिष्ट अतिथि के रूप में गिरजाशंकर शर्मा, प्रो. आयुर्वेदा, सतीश चौहान, देवेंद्र राघव, नीरज वैश्य, भानु प्रताप सक्सेना आदि थे।
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