आगरा में सरकारी यूरिया की तकनीकी तरीके से कालाबाजारी का मामला सामने आया है। आगरा जीएसटी के सचल दल ने सोडियम सल्फेट के पैकेट से लदे वाहन को पकड़ा है। इसके चालक ने बताया कि यह माल उसने हाथरस से लादा था। जीएसटी विभाग की सूचना पर जिला प्रशासन ने मामले की जांच उपकृषि निदेशक को सौंपी है।
आगरा जीएसटी सचल दल-4 ने सोडियम सल्फेट के पैकेट से लदे वाहन को कब्जे में लिया। माल के साथ मिले बिलों के अनुसार माल दिल्ली की एक फर्म ने महाराष्ट्र की एक फर्म को बेचा था, लेकिन जांच में दोनों ही फर्म फर्जी पाई गईं। भौतिक सत्यापन किए जाने के दौरान जब एक पैकेट को खोला गया तो अधिकारी को कुछ शंका हुई।
लिहाजा सहायक आयुक्त सचल दल-चार आगरा दीपिका जैन ने कृषि विभाग को सूचित किया। कृषि विभाग आगरा ने सोडियम सल्फेट के पैकेट को जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा। वहां पता चला कि पैकेट के अंदर सोडियम सल्फेट नहीं, बल्कि नीम अलेपित यूरिया है। इस पर किस अन्य रसायन का प्रयोग कर रंग को बदल दिया गया है।
चूंकि नीम अलोपित यूरिया सिर्फ कृषि कार्य के लिए किसानों को सरकार की ओर से सीधे मुहैया कराया जाता है। ऐसे में साफ हुआ कि इसे सोडियम सल्फेट के पैकेट में पैक कर सरकारी यूरिया की कालाबाजारी की जा रही है। जांच के दौरान चालक कुलदीप कुमार व सत्यप्रकाश ने बयान दिया कि उन्होंने ये माल हाथरस बाईपास की जगदंबा ट्रांसपोर्ट से लादा है।
कृषि विभाग की ओर से दिल्ली की विक्रेता फर्म जेएल इंटरप्राइजेज के साथ चालक कुलदीप कुमार निवासी जलेसर व सत्यप्रकाश निवासी आगरा के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है। कालाबाजारी के लिए हाथरस में पैकिंग कराए जाने की जानकारी पर डीएम हाथरस ने उपकृषि निदेशक को जांच का जिम्मा सौंपा है।
जगदंबा ट्रांसपोर्ट के संचालक से हो रही पूछताछ
आगरा-अलीगढ़ बाईपास स्थित जगदंबा ट्रांसपोर्ट कंपनी से कृषि विभाग की टीम पूछताछ में जुटी है। खबर लिखे जाने तक ट्रांसपोर्ट के मालिकानों की ओर से इस तरह की कोई भी गाड़ी लादने की बात से साफ इंकार किया गया है। कृषि विभाग लगातार सरकारी यूरिया की कालाबाजारी करने वालों तक पहुंंचने की कोशिश में जुटा है।
सासनी व सादाबाद से जुड़ रहे कालाबाजारी के तार
सूत्रों का कहना है कि हाथरस में सासनी व सादाबाद यूरिया की कालाबाजारी के मुख्य केंद्र हैं। इसके अलावा पड़ोसी जनपद एटा का कस्बा जलेसर भी यूरिया की कालाबाजारी व प्रयोग के लिए बाजार में प्रसिद्ध है। माना जा रहा है कि जगदंबा ट्रांसपोर्ट से जो यूरिया ट्रक में लादा गया, वह सासनी की किसी अघोषित फैक्टरी में तैयार किया गया था।
रंग, चमड़ा व अन्य उद्योग में काम आती है यूरिया
कृषि के लिए मुहैया कराई जानी वाली यूरिया की कालाबाजारी का मुख्य कारण इसका अन्य प्रकार के उद्योग में भी प्रयोग होना है। रंग और चमड़ा उद्योग के साथ अन्य कई प्रकार के उद्योगों में यूरिया को प्रयोग में लिया जाता है। यूरिया की जितनी मांग कृषि प्रयोग के लिए है, लगभग उतनी ही मांग अन्य प्रकार के उद्यमों के लिए है।
2183 रुपये का अनुदान कालाबाजारी की वजह
सरकार की ओर से कृषि प्रयोग के लिए मुहैया कराए जाने वाले यूरिया पर भारी अनुदान दिया जाता है। कृषि कार्य के लिए सरकार द्वारा मुहैया कराई जाने वाली यूरिया के 45 किलो के बोरे की कीमत लगभग 242 रुपये है। इस पर लगभग 2183 रुपये का अनुदान सरकार देती है। अगर यही बोरा सामान्य उद्यमी बाजार से लेगा तो उसे इसके लिए कम से कम 2425 रुपये कीमत चुकानी होगी। यूरिया की कालाबाजारी सबसे बड़ी वजह यही है।
ऐसे शुरू होता है कालाबाजारी का खेल
नीम अलोपित यूरिया की बिक्री का पूरा लेखा-जोखा सरकारी या प्राइवेट दुकानदारों को अपने पास रखना होता है। किस किसान को कितना यूरिया दिया गया, दुकानदार बकायदा अपने रजस्टिर में चढ़ाता है। इस खेल की शुरुआत यहीं से होती है। उदाहण के तौर पर समझें तो किसी किसान ने अपने दस्तावेजों पर दो कट्टे यूरिया खरीद की तो दुकानदार उसके नाम पर पांच बोरे यूरिया लिख देता है। किसान इस पर ध्यान नहीं देता। इसी तरह से तमाम कट्टों का दुकानदार स्टॉक कर लेता है। इसे औद्योगिक प्रयोग के लिए पांच सौ रुपये प्रति बोरा की कालाबाजारी के साथ ऐसी कंपनी को बेच दिया जाता है, जो इसे अन्य प्रकार के रसायनों आदि के पैकेट में पैक कर अन्य जनपदों में भेज देती हैं। वहां मोटे मुनाफे के साथ उद्यमियों को बेचा जाता है। बिना सब्सिडी वाले यूरिया की कीमतों की अपेक्षा कहीं कम दामों पर उद्यमी को नीम अलोपित यूरिया मिल जाती है।
हमने सोडियम सल्फेट के पैकेट से लदी एक गाड़ी पकड़ी थी। चालकों ने अपने बयान में बताया कि माल हाथरस के बाईपास स्थित जगदंबा ट्रांसपोर्ट से लादा गया है। भौतिक सत्यापन में यूरिया प्रतीत होने पर कृषि विभाग की टीम को बुलाया गया। टीम ने नमूना प्रयोगशाला भेजा, जहां इसकी पहचान नीम कोटेड यूरिया के रूप में हुई है। वाहन माल सहित अभी हमारे कब्जे में है। इसे जल्द ही कृषि विभाग को सौंपा जाएगा।
दीपिका जैन, सहायक आयुक्त, सचल दल चार, आगरा।
उद्योगों के लिए टेक्नीकल ग्रेड की यूरिया की आपूर्ति होती है। आगरा में इस ग्रेड के बोरों में नीम कोटेड यूरिया मिली है। आगरा से मिली जानकारी के आधार पर शहर की जगदंबा ट्रांसपोर्ट पर जांच के लिए कृषि रक्षा अधिकारी को भेजा गया है। वहां से सासनी के एक गोदाम से माल का लदान होने की जानकारी मिली है। मामले की जांच जारी है।
हंसराज, उप कृषि निदेशक, हाथरस।