बिसावर के गांव गढ़ तसींगा निवासी कन्हैयालाल ने भी 1971 भारत पाकिस्तान युद्ध में दुश्मनों से लोहा लिया था। इस युद्ध में देश की रक्षा करते करते वह बलिदान हो गए। उस समय उनकी पत्नी गर्भवती थी। उनकी पत्नी ने एक बेटे को जन्म दिया, इसके बाद वह भी कई साल पहले चल बसीं। बेटे पप्पू ने बताया कि जब उनके पिता बलिदान हुए थे, तब 15 बीघा जमीन पट्टे पर मिली थी, लेकिन वह भी उन्हें नहीं मिल सकी। इसके अलावा घोषणा के बाद न तो उसके पिता का शहीद गेट बनवाया गया और न ही कोई प्रतिमा लगवाई गई। अब पप्पू के परिवार में उसकी दो बेटी और एक बेटा और पत्नी है। फिलहाल, वह हलवाईगीरी का काम कर रहे हैं। उनकी आर्थिक स्थिति भी ठीक नहीं है।
न प्रतिमा लगी और न पार्क बनाया
बिसावर के गांव नौपुरा मई निवासी हरी सिंह ने भी 1971 के भारत पाक युद्ध में बलिदान दे दिया था। आज, उनके परिवार में उनकी भाभी व उनके दो बच्चे हैं। भाभी का कहना है कि उस समय सरकार ने कई घोषणाएं की थीं। हरी सिंह की स्मृति में न तो कोई गेट बनाया न कोई प्रतिमा लगी और न कोई पार्क बनाया गया और न ही उनके परिवार को किसी सरकारी सुविधा का लाभ दिया गया। हालांकि उनके नौहरे में आज भी प्रशासन द्वारा लगवाया एक पत्थर लगा हुआ है, जो कि आज भी हरी सिंह की याद दिलाता है।
हाथरस के शहीद
1-हवलदार भीष्मपाल सिंह, बनवारीपुर सिकंदराराऊ
2-सिपाही हंबीर सिंह , सीकुर सासनी
3-सिपाही श्याम सिंह, कंचना मुरसान
4-सिपाही बिजेंद्र सिंह, मानिकपुर सादाबाद
5-लांस नायक कन्हैया लाल ,गढ़ तसींगा सादाबाद
6-सिपाही राम शरन सिंह, धनौटी सादाबाद
7-सिपाही हरी सिंह , नौपुरा मई सादाबाद
(साथ में सिंकदराराऊ से राकेश वार्ष्णेय, मुरसान से रवि शर्मा, बिसावर से अखिलेश वार्ष्णेय)