निराश्रित गोवंश के लिए गोशालाएं बनाने की कवायद शुरू हो गई। मनरेगा व ग्राम पंचायत निधि से जिले की प्रत्येक ग्राम पंचायत में 50-50 गोवंश की क्षमता वाली गोशालाएं बनाई जाएंगी। इस संबंध में डीएम अर्चना वर्मा ने सभी उप जिलाधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्र की ग्राम पंचायतों में भूमि चयन के निर्देश दिए हैं।
शासन स्तर से निराश्रित गोवंश को संरक्षित करने के लिए अस्थाई गोशालाओं का निर्माण किया जा रहा है। पिछले दिनों के प्रभारी मंत्री असीम अरुण ने प्रत्येक ग्राम पंचायत में एक-एक गोशाला का निर्माण करने के निर्देश जारी किए थे। उन्होंने कहा था कि इन गोशालाओं की क्षमता कम से कम 50 निराश्रित गोवंशों को रखने की होनी चाहिए। प्रभारी मंत्री के आदेश के क्रम में स्थानीय जिला प्रशासन ने कवायद शुरू कर दी है।
डीएम अर्चना वर्मा ने सभी उप जिलाधिकारियों को अपने-अपने तहसील क्षेत्र की ग्राम पंचायतों में भूमि का चयन के निर्देश जारी किए हैं। भूमि चयन की प्रकिया संबंधित लेखपालों के माध्यम से शुरू हो गई है। इन गोशालाओं के निर्माण में मनरेगा व ग्राम पंचायत निधि से धनराशि खर्च की जाएगी। इनका संचालन ग्राम पंचायतों के माध्यम से किया जाएगा। ग्राम पंचायतों में गोशालाएं बनने से किसानों को भी बड़ी राहत मिलेगी, उनकी फसलों का नुकसान बचेगा।