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Hathras News: चंद रुपये की खातिर भूले पढ़ाई, स्कूल वक्त में कर रहे आलू खोदाई

Wed, 15 Mar 2023 02:47 AM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस

सार

आलू खोदाई ने बच्चों की पढ़ाई को चौपट करना शुरू दिया है। सरकारी स्कूलों के तमाम बच्चे स्कूल के वक्त में खेतों में जाकर आलू की खोदाई कर रहे हैं तो सस्ते मजूदर के रूप में किसान नाबालिगों को प्राथमिकता भी दे रहे हैं।
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आलू खोदाई करते स्कूली बच्चे - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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चंद रुपये की खातिर छात्रों ने सरकारी स्कूलों में जाना छोड़ दिया है। स्कूल के वक्त में छात्र खेतों में आलू की खोदाई और बिनाई कर रहे हैं। जबकि शिक्षा विभाग लगातार स्कूलों में छात्रों की उपस्थिति बढ़ाने पर जोर दे रहा है तो 20 मार्च से परिषदीय स्कूलों में वार्षिक परीक्षाएं शुरू होने वाली हैं। 

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हाथरस जिला आलू उत्पादन के लिए मशहूर है। इस बार 48 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में आलू की बंपर पैदावार हुई है। आलू के उचित भाव नहीं मिलने से किसान पहले से ही पेरशान हैं तो बीते दिनों हुई बारिश ने उनकी चिंता और बढ़ा दी है। शीतगृहों का किराया बढ़ने और ऑपरेशन ग्रीन के लाभ की आस कम होने से किसान दोहरी मार झेल रहे हैं। अब आलू खोदाई ने बच्चों की पढ़ाई को चौपट करना शुरू दिया है। 

आर्थिक रूप से कमजोर परिवार चंद रुपये की खातिर अपने बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ करने से नहीं चूक रहे हैं। सरकारी स्कूलों के तमाम बच्चे स्कूल के वक्त में खेतों में जाकर आलू की खोदाई कर रहे हैं तो सस्ते मजूदर के रूप में किसान नाबालिगों को प्राथमिकता भी दे रहे हैं। खेतों में खोदे गए आलू को एकत्रित करने के लिए ज्याद श्रमिकों की आवश्यकता छात्रों से ही पूरी की जा रही है। छात्रों को स्कूलों में रोकने वाले या पढ़ाई के प्रति प्रेरित करने वाले अधिकारी भी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। 
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प्रारंभिक जानकारी में पता चला है कि बच्चे खेतों में काम करने की वजह से स्कूल नहीं आ रहे हैं। यदि छात्र रुपयों के लिए खेतों में काम कर रहे हैं तो यह चिंताजनक है। यदि बच्चे खेतों में अपने माता-पिता का हाथ बंटा रहे हैं तो उन्हें समझाया जाएगा। शिक्षकों को घर-घर जाकर अभिभावकों से संपर्क कर बच्चों को स्कूल भेजने के लिए कहा है। - राहुल कुमार पवार, बीएसए 

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करीब 40 फीसदी बच्चे गैरहाजिर 

बेसिक शिक्षा विभाग के अनुसार परिषदीय इन दिनों स्कूलों में करीब 35 से 40 फीसदी बच्चे गैरहाजिर चल रहे हैं। इनमें स्कूलों नहीं आने में बड़ी तादात छात्राओं की है। जब इनके बारे में जानकारी की गई तो पता चला कि ये बच्चे आलू की खोदाई में लगे हुए हैं। इसमें किसानों के बच्चे भी शामिल हैं।

200 से 250 रुपये में मजदूरी
आलू खोदाई बौर बिनाई के लिए किसानों को जहां वयस्क मजूदर 300 से 400 रुपये दिहाड़ी पर मिलते हैं, वहीं स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे मात्र 200 से 250 रुपये में दिनभर खेतों में काम करने को तैयार हो जाते हैं। बड़े फर्म स्वामी बच्चों को ट्रैक्टर-ट्रॉली से खेत पर ले जाते हैं। ये बच्चे सुबह आठ बजे से शाम छह बजे तक खेत में काम करते हैं।

ट्रॉली से गिरकर छात्रा की हो चुकी मौत 
सादाबाद में एक मार्च को एक छात्रा ट्रैक्टर-ट्रॉली पर सवार होकर आलू खोदाई के लिए जा रही थी। आगरा रोड पर कुरसंडा मोड़ के निकट ट्रैक्टर-ट्रॉली स्पीड ब्रेकर के ऊपर उछल गई थी। इससे ट्रॉली मेंं बैठी नसरीन सिर के बल सड़क पर जा गिरी थी और उसकी उपचार के दौरान उसी दिन मौत हो गई थी।

लागत से कम मिल रहा दाम
जिले में कुल 161 शीतगृह हैं, जिनमें से 150 शीतगृह संचालित हैं, जिनमें 12 लाख 63 हजार मीट्रिक टन फसल भंडारण की क्षमता है। शीतगृह संचालकों ने 10 रुपये प्रति पैकेट के हिसाब से किराया बढ़ा दिया है। किसानों के मुताबिक फसल बोने से लेकर खोदाई और शीतगृह में भंडारण लागत ही करीब 500 रुपये प्रति क्विंटल आ रही है। मंडी में लागत के बराबर सी ही कीमत यानी करीब 550 रुपये प्रति क्विंटल आलू के दाम मिल रहे हैं। वहीं सरकार भी आलू को 600 रुपए प्रति कुंतल की दर से खरीदने की बात कह रही है।  

घर-घर बच्चों को तलाश रहे शिक्षक
परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले कक्षा चार से कक्षा आठवीं तक के कुछ छात्र मजदूरी पर खेतों में आलू बीन रहे हैं या फिर अपने परिवार के लोगों का सहयोग करने में लगे हैं। शिक्षकों ने बताया कि वह गांव में बच्चों को स्कूल लाने के लिए घर-घर जा रहे हैं, लेकिन उनके अभिभावक ही बच्चों को स्कूल नहीं भेज रहे। अभिभावक कहते हैं कि बच्चा खेत में आलू बीनने के लिए गया है। आप यहां क्यों आए हैं? 
 
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