पुर्नस्थापन दाखिल-खारिज के वादों की ऑनलाइन फीडिंग न होने से किसान परेशान हैं। उन्हें न तो बैंक से ऋण मिल पा रहा है और न ही अन्य आवश्यक कार्य हो पा रहे हैं। वहीं, कई कई महीनों के दायरा वादों का निस्तारण भी नहीं हो पा रहा है। ऐसे में इन वादों की फीडिंग का बोझ भी लगातार बढ़ता जा रहा है। इसे लेकर दी बार एसोसिएशन के पूर्व उपाध्यक्ष हरीशंकर गिरी एडवोकेट ने मुख्यमंत्री को शिकायती पत्र भेजा है। उन्होंने कहा है कि किसान तहसील कार्यालय के चक्कर पर चक्कर काट रहे हैं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो रहा है। उन्होंने न्यायहित में ऑनलाइन सॉफ्टवेयर को दुरुस्त कराने की मांग की है।