बहटा में पांचवीं बेटी पैदा होने पर अवसाद के चलते जान देने वाले विनीत के घर सोमवार को सन्नाटा पसरा रहा। सभी जुबां पर यही सवाल है कि बेटियां बोझ नहीं थीं, फिर क्याें जान दे दी।
हाथरस जंक्शन क्षेत्र के गांव बहटा निवासी विनीत पुत्र नेत्रपाल हाथरस जंक्शन क्षेत्र के पांच बेटियां हैं। मृतक की पत्नी मालती देवी ने बताया कि पहली बेटी रोनू (15) और बबली (13) कक्षा आठ में सलेमपुर स्थित सरकारी जूनियर स्कूल में पढ़ने जाती थीं। इस साल आर्थिक तंगी के चलते दूसरे विद्यालय में नौवीं कक्षा में उनका दाखिला नहीं हो पाया। वहीं तीसरी बेटी 11 वर्षीय सोना कक्षा छह में परिषदीय विद्यालय में पढ़ती है। चौथी बेटी नौ वर्षीय डिंपल कक्षा 4 में गांव के सरकारी प्राथमिक विद्यालय पढ़ती है।
पिता की मौत के बाद पांचवीं बेटी का फिलहाल नामकरण नहीं हो पाया है। मृतक के राशन कार्ड में पति और पत्नी का नाम है। बच्चों के नाम राशन कार्ड में नहीं हैं। विनीत पहले गुजरात में काम करते थे। लॉकडाउन के बाद वह गांव में आकर रहने लगे। उनके परिवार को सरकार की तरफ से कोई भी लाभ नहीं मिल पाया है। मकान भी गिरासू अवस्था में है। यहां तक कि महिला समूह के अंतर्गत उन्होंने दो निजी समूहों से 50-50 हजार रुपये का कर्ज भी ले रखा है।