न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम ओमपाल सिंह के न्यायालय ने डायट हाथरस में कूटरचित शैक्षिक प्रमाण पत्रों के आधार पर बीटीसी में एडमिशन लेने वाली दो बहिनों को आरोपी माना है।
न्यायालय ने दोनों को दो साल की कैद एवं 700-700 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड अदा न करने की स्थिति में 20-20 दिन के अतिरिक्त कारावास भोगने का आदेश दिया है।
कोतवाली हाथरस गेट में दीप्ती सिंह निवासी टीचर्स कॉलोनी हाथरस जंक्शन के खिलाफ हरीसिंह निवासी रमनपुर ने 3 अगस्त, 2012 को रिपोर्ट दर्ज कराई। जिसमें दीप्ती द्वारा हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट के कूटरचित शैक्षिक प्रमाण पत्रों के आधार पर बीटीसी करने के आरोप लगाए। इन शैक्षिक प्रमाण पत्रों के बोर्ड से हुए सत्यापन की भी उनके द्वारा जानकारी दी गई थी।
न्यायालय ने इसे दोष सिद्ध मानते हुए धारा 417 में छह माह की सजा एवं 100 रुपये अर्थदंड, धारा 467 में दो वर्ष की सजा एवं 200 रुपये अर्थदंड, और धारा 471 में एक वर्ष की सजा एवं 100 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड न देने पर 20 दिन के अतिरिक्त कारावास का प्रावधान किया है।
इसी की छोटी बहिन गौरव सिंह निवासी टीचर्स कॉलोनी हाथरस जंक्शन के खिलाफ 22 जून, 2012 को डायट को परिषद से प्राप्त हुए शैक्षिक प्रमाण पत्रों के सत्यापन के आधार पर शैक्षिक प्रमाण पत्र कूट रचित पाए गए थे। इन शैक्षिक प्रमाण पत्रों के आधार पर गौरव सिंह ने बीटीसी 2010 में प्रवेश लिया।
इसकी रिपोर्ट तत्कालीन डायट प्राचार्य हरिवंश सिंह ने कोतवाली हाथरस गेट में 31 जुलाई 2012 को दर्ज कराई। न्यायालय ने इसे भी दोष सिद्ध मानते हुए धारा 420 में दो साल की कैद 200 रुपये अर्थदंड, धारा 467 में दो साल की कैद, 200 रुपये अर्थदंड, धारा 468 में दो साल की कैद, 200 रुपये अर्थदंड, धारा 471 में एक साल की कैद, 100 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई हैं।
इन दोंनों ही मामलों में न्यायालय में वादी की ओर से पैरवी एसपीओ अरविंद कुमार भाटी ने की।