हाथरस। अपर सत्र न्यायाधीश तृतीय एसएन त्रिपाठी के न्यायालय ने हत्या के दो आरोपियों को दोषी करार दिया है। न्यायालय ने दोनों को आजीवन कारावास और 40-40 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड अदा नहीं करने की स्थिति में दोषियों को 10-10 माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। अर्थदंड की धनराशि प्राप्त होने पर उसका 70 प्रतिशत मृतक की बेवा को प्रतिकर देना होगा।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक कोतवाली हाथरस जंक्शन में वादी गीतम सिंह निवासी कस्बा मेंडू ने 27 जून,1999 को रिपोर्ट दर्ज कराई, जिसमें उसका आरोप था कि वह और उसके पिता मुंशीलाल उसकी घरवाली कुसुमा, पप्पू और बुद्धसेन पुत्र गनपत और कुमारी कुंती पुत्र झब्बूलाल बाग और खेतों में काम कर रहे थे। करीब 3 बजे उसके गांव के बाबूलाल, भूरा, कालीचरण, वासदेव और ननुआ अपने हाथों में लाइसेंसी और अन्य हथियार लेकर आए। इन लोगों ने आते ही अंधाधुंध फायरिंग करनी शुरू कर दी। उसके पिता की तो गोलियां लगने से मौके पर ही मौत हो गई। कालीचरण ने उसके पिता मुंशीलाल की गर्दन पर छुरा मारा। वह अपनी जान बचाकर मेंडू अड्डा की तरफ भागा। तभी बाबूलाल और भूरा ने उस पर जान से मारने की नीयत से फायर किए। भूरा अपने चाचा चंद्रपाल की इकनाली बंदूक लेकर आया था।
पुलिस ने इस मामले में वासुदेव, ननुआ और चंद्रपाल के नाम आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। न्यायायल ने इस दौरान दोनों पक्षों के विद्वान अधिवक्ताओं को सुना और आरोपी वासदेव और ननुआ को दोषी माना। न्यायालय ने दोनों को हत्या के जुर्म में आजीवन कारावास एवं 40-40 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड अदा नहीं करने की स्थिति में 10-10 माह के अतिरिक्त कारावास की भी व्यवस्था दी है। इसके साथ ही ननुआ को धारा 25 आयुध अधिनियम के तहत तीन वर्ष का कारावास व 3 हजार रुपये के अर्थदंड, धारा 147,148 के तहत एक-एक वर्ष के कारावास और एक-एक हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है, जबकि चंद्रपाल को न्यायालय ने आरोप मुक्त कर दिया है।