राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने सादाबादियान गली निवासी राजेश शर्मा उर्फ टोंटा की हत्या के मामले में अहम टिप्पणी करते हुए कहा है कि हत्या में पुलिस की मिलीभगत को खारिज नहीं किया जा सकता।
आयोग ने राज्य सरकार को हत्या के लिए जिम्मेदार ठहराया है। इसके अलावा आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव को राजेश के परिजनों को एक लाख रुपये का मुआवजा दिलाने और कारागार विभाग के डीजी को तत्कालीन अधिकारियों की जांच के निर्देश भी दिए हैं। राजेश टोंटा की पत्नी कनक शर्मा ने आयोग से शिकायत कर मथुरा पुलिस पर पति की हत्या का आरोप लगाया था।
आयोग ने बीते महीने इस संबंध में शिकायत का निस्तारण करते हुए का है कि जेल के अंदर राजेश पर हमला और इसके बाद जेल के बाहर उन पर किए गए हमले से साफ है कि राज्य सरकार राजेश की सुरक्षा में नाकाम साबित हुई क्योंकि राजेश न्यायिक हिरासत में थे। आयोग ने कहा है कि जेल के अंदर हथियार पहुंचने की बात बेहद गंभीर है। उस समय जेल में हुए गैंगवार के मामले की गहराई से जांच होनी चाहिए। आयोग ने बेहद गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा है कि राजेश शर्मा की हत्या में पुलिस की मिलीभगत के आरोपों को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता।
पुलिस की चूक के कारण ही राजेश की हत्या हुई थी। मालूम हो कि बृजेश मावी की हत्या के आरोप में मथुरा जेल में बंद राजेश शर्मा उर्फ टोंटा को मारने के लिए जनवरी 2015 में मावी गैंग के कुछ लोगाें ने उन पर जेल में हमला किया गया था। इसमें टोंटा को कई गोलियां लगी थीं। इसके बाद उन्हें मथुरा से आगरा मेडिकल कॉलेज एंबुलेंस में ले जाया जा रहा था।
आरोप है कि बीच रास्ते में टोंटा के विरोधी गैंग ने एंबुलेंस रोककर टोंटा के सीने में कई गोलियां उतार दीं थीं, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई थी। राजेश की पत्नी कनक शर्मा ने मथुरा की तत्कालीन एसएसपी मंजिल सैनी पर राजेश की हत्या का षड्यंत्र रचने का आरोप भी लगाया था।