हाथरस। जिस पिता की उंगली पकड़कर उसे चलना सिखाया। खून-पसीने की कमाई से लालन-पालन कर बड़ा किया। बेटे ने अपने पिता से उस वक्त मुंह मोड़ लिया, जब उसे बेटे की सबसे ज्यादा जरूरत थी। पिता की मौत के बाद डॉक्टर बेटे को फोन मिलाते रहे लेकिन वह शव लेने नहीं आया।
इमरजेंसी मेडिकल अफसर एके सिंह ने बताया कि चंदपा क्षेत्र के गांव के कटेलिया निवासी रिषीपाल (50) को कुछ दिन पहले ही उसके बेटे ने अचेत अवस्था में अस्पताल में भर्ती कराया था। बेटा उसी वार्ड में भर्ती एक मरीज को फोन नंबर देकर चला गया। उसने कहा था कि अगर पिता को कोई परेशानी हो तो उसे फोन कर सूचित कर दें। इसके बाद युवक वापस नहीं लौटा।
उसके पिता आखिरी सांसें ले रहे थे, तब भी मरीज और उसके तीमारदारों ने फोन लगाया, इतने के बावजूद बेटे का दिल नहीं पसीजा। शनिवार को रिषीपाल की मौत हो गई। तीमारदार और अस्पताल के कर्मचारी उसे फोन लगाते रहे लेकिन उसने आने से मना कर दिया। जब ज्यादा फोन किए गए तो बेटे ने अपना फोन ही बंद कर लिया। इसके बाद अस्पताल प्रशासन को ग्राम प्रधान को बुलाया। प्रधान रिषीपाल का शव ले गए और गांव में विधिविधान से अंतिम संस्कार कराया।