शनिदेव की प्रतिमा हटाने पर एसडीएम से होती क्षेत्रीय लोगों की नोकझोंक
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निकटवर्ती कस्बा मुरसान में पुलिस द्वारा शनिदेव की मूर्ति हटाने पर रविवार को खासा हंगामा हुआ। लोगों ने कस्बे के बाजार बंद कर दिए। पुलिस और नगर पंचायत प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। मौके पर पहुंचे अधिकारियों को आक्रोशित लोगों ने घेर लिया और उनकी तीखी नोक-झोंक हुई। एक नेता से तो एक पुलिस अधिकारी की हाथापाई तक की नौबत आ गई। स्थिति गंभीर देख पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके से लौट आए। बाद में कस्बे के कुछ लोगों के साथ बैठक कर इस बात पर सहमति बनी कि जहां मूर्ति लगाई गई थी, वहां मूर्ति नहीं लगेगी और कोई निर्माण कार्य भी नहीं होगा। अगले आदेश तक यथास्थिति बरकरार रहेगी।
इसके साथ ही पुलिस अधिकारियों ने कस्बे में एक पुलिस चौकी बनाने का आश्वासन भी लोगों को दिया। किसी भी बड़े बवाल की आशंका के चलते कस्बे में पुलिस फोर्स भी तैनात रही।
कस्बा मुरसान में बड़ा बाजार शिव मंदिर के निकट एक बंद कुएं की जगह पर शनिवार की शाम को कुछ लोगों ने शनिदेव की मूर्ति रख दी थी और वहां मंदिर बना दिया था। नगर पंचायत मुरसान इस जमीन को अपना बता रही है। इस मामले की जानकारी जब पुलिस को हुई तो पुलिस इस मूर्ति को कुछ नगर पंचायत कर्मियों के साथ वहां पहुंचकर अपने साथ ले आई।
रविवार को जब कस्बे के लोगों को यह पता चला कि मूर्ति को पुलिस थाने ले गई है तो लोगों में आक्रोश व्याप्त हो गया। इन लोगों सुबह से ही कस्बे का बाजार बंद करा दिया और शिव मंदिर के निकट एकत्रित हो गए। बाजार बंद की जानकारी मिलने पर जब कोतवाली निरीक्षक मुरसान वहां पहुंचे तो लोगों ने उनके सामने तीखा विरोध जताया और मूर्ति फिर से स्थापित करने की मांग की। इस पर कोतवाली निरीक्षक यह कहकर वहां से चले गए कि इस बारे में एसडीएम सदर और अन्य अधिकारी फैसला करेंगे।
बाद में एसडीएस सदर अरुण कुमार सिंह और सीओ सादाबाद योगेश कुमार भी वहां पहुंच गए। यह अधिकारी जब मय पुलिस फोर्स के कस्बे में पहुंचे तो लोगों ने इन्हें घेर लिया। वहां पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष देशराज सिंह, पूर्व नगर पंचायत अध्यक्षगिर्राज किशोर शर्मा, नगर पंचायत मुरसान में इस बार प्रत्याशी रहे व राजा महेंद्र प्रताप के प्रपौत्र गरुणध्वज सिंह भी मौजूद थे। गरुणध्वज की तीखी नोक-झोंक अधिकारियों से हो गई और वहां खासा हंगामा खड़ा हो गया।
लोगों की मांग थी कि मूर्ति को इसी स्थान पर स्थापित किया जाए। हालात विपरीत देख अधिकारी वापस लौट आए। उसके बाद काफी देर तक थाने में अधिकारियों की कस्बे के प्रभावशाली लोगों से बात हुई। तदुपरांत यह तय हुआ कि मूर्ति नहीं लगेगी और वहां नगर पंचायत की दुकान आदि भी नहीं बनेगी। स्थिति जैसे है, वैसे ही रहेगी। यही नहीं पुलिस अधिकारियों ने जल्द ही कस्बे में सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस चौकी स्थापित करने की भी घोषणा की। तब कहीं जाकर लोगों का गुस्सा शांत हुआ।