बेसिक शिक्षा विभाग में 22 साल बाद सामने आई फर्जी शिक्षिका सरस्वती की बेसिक शिक्षा अधिकारी रेखा सुमन ने बुधवार को सेवा समाप्त कर दी। इस मामले में अब तक विभाग ने पूरी जांच-पड़ताल कर ली है। शिक्षिका के खिलाफ फर्जी तरीके से प्राप्त किए गए वेतन की वसूली एवं कूट रचित दस्तावेजों से नौकरी करने के मामले में रिपोर्ट दर्ज कराए जाने की विभाग द्वारा तैयारी भी की जा रही है।
बेसिक शिक्षा अधिकारी से पूर्व सहायक अध्यापक अमर सिंह पूर्व माध्यमिक विद्यालय वास पोहपी सादाबाद ने एक शिकायत की, जिसमें उन्होंने आरोप लगाए कि ब्लॉक मुरसान के पूर्व माध्यमिक विद्यालय कथरिया में नौकरी कर रही सहायक अध्यापिका सरस्वती देवी पत्नी पत्नी महेश कुमार शर्मा निवासी मधुगढ़ी ने विभाग में फर्जी तरीके से पिछड़े वर्ग के जाति प्रमाण पत्र के माध्यम से नौकरी हासिल की है। बीएसए ने इस शिक्षिका को नोटिस जारी कर इसके बाद स्पष्टीकरण मांगा। एक के बाद एक लगातार नोटिस जारी होने के बाद भी जब शिक्षिका ने बेसिक शिक्षा अधिकारी को नोटिस का जवाब नहीं दिया तो बीएसए ने अप्रैल 2017 में उनका वेतन अवरुद्ध करने के आदेश जारी कर दिए।
इस बीच इस फर्जी शिक्षिका की मार्च 2018 में सेवानिवृत्ति के लिए पत्रावली एओ कार्यालय पहुंच गई। जानकारी होने पर बीएसए ने इसकी पत्रावली की स्वीकृति पर रोक लगाने के आदेश जारी किए। उन्होंने इस मामले में बीईओ हसायन जमुना प्रसाद सुमन को अचानक इसकी जांच के लिए विभागीय रिकॉर्ड में उपलब्ध पते मुरसान ब्लॉक के ही गांव नया नगला बाद अठवरिया भेजा। जहां पता चला कि जिस महिला के नाम से विभाग में 22 साल से नौकरी चल रही है, उस महिला की करीब 22 साल पहले ही मौत हो चुकी है। मृतका सरस्वती ने 1996 में बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षक की आवश्यकता योग्यता हासिल करने के बाद विभाग में सहायक अध्यापक पद पर नौकरी के लिए आवेदन तो किया था, लेकिन विभाग में तैनाती होने से पूर्व ही इसकी मौत हो गई थी।