अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश एसएफटीसी प्रथम सुरेंद्र मोहन सहाय के न्यायालय ने किशोरी को बहला-फुसलाकर ले जाने एवं दुुष्कर्म के बाद गला दबाने के बाद मृत समझकर तेजाब डालकर ईख के खेते में फेंकने के आरोपी को उम्र कैद की सजा सुनाई है।
आरोपी को सभी धाराओं में 23 हजार रुपये के अर्थदंड से भी दंडित किया है। अर्थदंड अदा नहीं करने पर उसे चार माह का अतिरिक्त कारावास भुगतने का आदेश भी न्यायालय ने दिया है। न्यायालय ने यह भी कहा है कि अर्थदंड की 50 प्रतिशत धनराशि वादी को प्रतिकर के रूप में देनी होगी। गौरतलब है कि मामला दो समुदायों का होने के कारण जिले में कई दिनों तक धरना-प्रदर्शन एवं आंदोलन भी हुआ था।
पीड़िता के पिता ने कोतवाली हाथरस जंक्शन पुलिस को एक तहरीर दी थी, जिसमें आरोप था कि उनकी पुत्री 19 जून 2012 को समय करीब 12 बजे दोपहर गांव से दवा लेने गई थी, जो लौटकर नहीं आई। उसकी उसने काफी तलाश की, लेकिन उसका कुछ पता नहीं चला। पुलिस इस दौरान मामले में टालमटोल करती रही, लेकिन एक सितंबर 2012 को यह किशोरी महमूद नगर थाना सिविल लाइन क्षेत्र में मुजफ्फरनगर में नहर के पास एक ईख के खेत में घायल अवस्था में बरामद हुई।
पुलिस ने बरामदगी के बाद उसे मुजफ्फरनगर जिला अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती कराया गया। उसने अपने बयान में बताया कि तरमीम पुत्र नासिर निवासी मकान संख्या 228 महमूदनगर थाना सिविल लाइन मुजफ्फरनगर मूल निवासी खाई खेड़ा थाना ककरौली जिला मुजफ्फरनगर उसे 31 अगस्त 2012 को मारने के लिए अपनी मोटर साइकिल पर बिठाकर ले गया। जहां उसने उसका गला दबाकर मारने का प्रयास किया।
यह उसे ईख के खेत में मरा हुआ समझकर उसके ऊपर तेजाब डालकर चला गया। किशोरी को होश आने पर उसकी चीखें सुनकर लोगों ने उसे उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया। पुलिस ने किशोरी का मृत्युपूर्ण बयान दर्ज किया और उसके परिजनों को घटना की जानकारी दी। जहां उपचार के दौरान किशोरी की मौत हो गई।
किशोरी ने अपने बयान में आरोपी द्वारा दुष्कर्म किए जाने की बात भी बताई। पुलिस ने इस मामले में आरोप पत्र आईपीसी की धारा 366, 326, 307, 302 के तहत आरोप पत्र दाखिल किया। सत्र परीक्षण के दौरान आरोपी ने आरोपों को गलत बताया और सत्र परीक्षण चाहा। सत्र परीक्षण के दौरान वादी की ओर से पैरवी एडीजीसी एसएस चौहान ने की। उनके द्वारा न्यायालय में प्रस्तुत किए गए साक्ष्यों का आरोपी पक्ष खंडन नहीं कर सका।
इसके बाद आरोपी को न्यायालय ने दोषी माना। न्यायालय द्वारा दिए गए निर्णय में धारा 366 में सात वर्ष की कैद और दो हजार रुपये अर्थदंड, धारा 368 में पांच वर्ष की कैद एवं एक हजार रुपये अर्थदंड, धारा 326 में दस वर्ष का कारावास एवं पांच हजार रुपये अर्थदंड, धारा 376 में दस वर्ष का कारावास एवं पांच हजार रुपये अर्थदंड, धारा 302 में आजीवन कारावास और 10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई। न्यायालय ने सभी सजाओं को एक साथ चलने का भी प्राविधान किया है।