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केरोसीन का टैंकर छोड़ने पर थाने में रार 

Fri, 30 Jun 2017 12:13 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, हाथरस।
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Tanker - फोटो : File Photo
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चंदपा थाने में एसओ और दारोगा के बीच जमकर विवाद हुआ। मिलावट करने के लिए पेट्रोल पंप जा रहे केरोसीन से भरे टैंकर को छोड़ने पर यह विवाद हुआ, जिसके बाद दरोगा ने जीडी में गाली-गलौज का तस्करा डाल दिया। इससे नाराज आला अधिकारियों ने गुरुवार को दरोगा शैलेंद्र प्रताप सिंह को लाइन हाजिर कर दिया।       
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शहर के पेट्रोल पंपों में बड़े पैमाने पर केरोसीन की मिलावट हो रही है। केरोसीन से भरे एक टैंकर पर चंद रोज पहले चंदपा पुलिस की नजर पड़ गई। रोकने पर पता चला कि टैंकर सिकंदराराऊ रोड स्थित एक पेट्रोल पंप के लिए जा रहा है। दारोगा शैलेंद्र प्रताप ने टैंकर चालक  व टैंकर में मौजूद लोगों को आरोपी बनाते हुए उनके बयान रिकॉर्ड कर लिए और जांच-पड़ताल कर सारी रिपोर्ट अपने पास रख ली। थाने से कुछ देर बाद इस टैंकर को छोड़ दिया गया।

दारोगा से कहा गया कि एडीजी का फोन आने पर टैंकर को छोड़ा गया है। पेट्रोल पंप वाला एडीजी का रिश्तेदार है। नाराज दरोगा शैलेंद्र प्रताप ने जांच-पड़ताल के दौरान जमा किए सारे बयान और रिपोर्ट को नष्ट नहीं किया। इसकी भनक जैसे ही एसओ को लगी तो दरोगा पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया गया। दरोगा का हलका उनसे छीन लिया गया। बताते हैं कि 24 जून को इसे लेकर गाली-गलौज और वाद-विवाद भी हुआ। दरेागा ने इस अभद्रता का जिक्र करते हुए जीडी में तस्करा लिख दिया। एसओ की रिपोर्ट पर आला अधिकारियों ने दरोगा को गुरुवार को लाइन हाजिर कर दिया। इस संबंध में एएसपी अरविंद कुमार से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन संपर्क नहीं हो सका।       
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एसओ का अधिकार होता है कि वह दरेागा का हलका बदले। हलका लिए जाने को लेकर दरोगा शैलेंद्र प्रताप ने थानाध्यक्ष से नोक-झोंक की। यह अनुशासनहीनता में आता है। जहां तक तेल का टैंकर छोडने की बात है तो इस बारे में मुझे जानकारी नहीं है। किसी ने इस बारे में कुछ नहीं कहा है। मामले की जांच सीओ सिकंदराराऊ को सौंपी गई है।       
- मनीषा सिंह, सीओ सादाबाद-      

दरोगा शैलेंद्र प्रताप सिंह अनुशासनहीनता व कार्य में लापरवाही कर रहे थे। इसलिए उन्हें लाइन हाजिर किया गया है। तेल का टैंकर छोड़े जाने की बात गलत है। अगर ऐसा था तो इस बारे में पहले कोई बात क्यों नहीं की गई। लाइन हाजिर किए जाने के बाद ही इस तरह की बात क्यों सामने आ रही हैं।       
- रमाकांत पचौरी, एसओ, मुरसान      

मैं एसओ से ज्यादा सीनियर हूं। एसओ रमाकांत 2008 बैच के दरेागा हैं और मैं 1998 बैच का दरोगा हूं। उनसे दस साल सीनियर हूं। बावजूद इसके मेरे साथ गाली-गलौज की गई। मेरी उम्र 50 साल के पार हो चुकी है। मेरे साथ इस तरह का व्यवहार किसी ने नहीं किया।       
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- शैलेंद्र प्रताप सिंह, आरोपी दरोगा
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