अपर सत्र न्यायाधीश एफटीसी प्रथम सुरेंद्र मोहन सहाय के न्यायालय ने दुष्कर्म के आरोपी को दोषी करार दिया है। न्यायालय ने अभियुक्त को आठ वर्ष के कारावास एवं 20 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड अदा नहीं करने की स्थिति में आरोपी को चार माह का अतिरिक्त कारावास भोगना होगा। न्यायालय ने अपने निर्णय में यह व्यवस्था भी दी है कि अर्थदंड की 50 प्रतिशत धनराशि पीड़ित को प्रतिकर के रूप में दी जाएगी। जेल में बिताई अवधि भी सजा में समायोजित होगी।
कोतवाली सासनी में पीड़िता के पिता द्वारा पांच नवंबर 2010 को तहरीर दी गई, जिसमें कहा गया कि वह दिव्यांग, गरीब और अनुसूचित जाति का है। रिक्शा चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करता है। वह दिवाली के त्योहार पर रिक्शा चलाकर अलीगढ़ से अपने घर आया तो उसने अपनी नाबालिग दिव्यांग पुत्री को कुछ सुस्त देखा। उसने जब बेटी से सुस्त होने का इसका कारण पूछा तो वह घबरा गई और रोने लगी। काफी समझाने-बुझाने पर उसने बताया कि जिस दिन उसकी मां ने अस्पताल में बच्चे को जन्म दिया था, उस दिन वह घर में अकेली थी।
अकेला पाकर राकेश उसे बहला-फुसलाकर अपने घर ले गया। उसने कमरे में बंद कर उसके साथ जबर्दस्ती जमीन पर गिराकर उससे दुष्कर्म किया। उसे यह धमकी दी कि अगर उसने किसी को बताया तो वह उसे और उसके परिवार को जान से मार देगा। डर के मारे बेटी ने किसी को कुछ नहीं बताया। रिपोर्ट दर्ज कराते समय उसकी पुत्री गर्भवती थी। उसने विधिवत रूप से कार्रवाई की मांग की। न्यायालय ने अभियुक्त को धारा 506 में भी दोषी मानते हुए दो वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने दोनों सजाएं साथ चलने का का प्रावधान किया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने इस मामले को सत्र परीक्षण के लिए एक फरवरी 2011 को सत्र न्यायालय के सुपुर्द किया था।