फर्जी टिकट बनाने वाला रैकेट रोडवेज बसों में फर्जी टिकट ही नहीं बनाता थी, बल्कि इन बसों पर फर्जी परिचालक भी चलते थे। जिस दिन गिरोह का सरगना देवेंद्र पकड़ा गया, उस दिन भी उसकी गिरफ्तारी के बाद बस में किसी फर्जी परिचालक ने टिकट काटे। यही नहीं, इस बस के चालक को भी हेराफेरी का पूरा मौका दिया गया और यह बस तीन दिन तक मथुरा में खड़ी रही। बाद में जब विभागीय अधिकारियों को अपनी गर्दन फंसती दिखाई दी, तब उन्होंने इस परिचालक सहित 16 कर्मियों की संविदा समाप्त की।
रोडवेज में फर्जी टिकट रैकेट के पकड़े जाने के बाद अब नये-नये सबूत सामने आ रहे हैं। रैकेट चलाने वाले न केवल फर्जी टिकट काटते थे, जबकि फर्जी परिचालक भी साथ रखते थे। इसका जीता-जागता सबूत उस दिन भी सामने आया, जबगैंग का सरगना परिचालक देवेंद्र पकड़ा गया। देवेंद्र जिस बस पर परिचालक था, उस बस पर संविदा के परिचालक शांतिस्वरूप की ड्यूटी थी। यह बस 21 अगस्त को अलीगढ़ से सवारियों को लेकर मथुरा चली थी।
रास्ते में इगलास से आगे और राया से पहले बिचपुरी पर देवेंद्र को एसटीएफ ने दबोच लिया। इसका उल्लेख खुद बस चालक शांति स्वरूप ने अपनी आख्या में किया है। इसके बाद भी इस बस में राया से मथुरा की सवारियां सवार हुईं और उनके टिकट भी बनाए गए। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या इस बस पर देवेंद्र के बाद कोई फर्जी परिचालक ड्यूटी दे रहा था। इतनी बड़ी कार्रवाई के बाद भी गिरोह अपना नेटवर्क बदस्तूर संचालित करता रहा।
यही नहीं बस चालक बस को मथुरा वर्कशाप पर खड़ी कर आया और फिर उसने तीन दिन बाद अधिकारियों को अपनी आख्या दी। इस मामले में शिकायतकर्ता पंकज लवानियां ने कहा है कि आखिर ऐसा कैसे हो गयाकि बस को मौके पर चालक ने नहीं रोका और सवारियां दूसरे वाहन में ट्रांसफर नहीं की। वैसे ऐसे कई सवालों के जवाब अधिकारियों के पास नहीं है।