फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

एक तरफ हंगामा, दूसरी तरफ मौन धरना

Mon, 02 Apr 2018 11:51 PM IST
क्राइम डेस्क, अमर उजाला, हाथरस।
विज्ञापन
जाम - फोटो : Amar Ujala
विज्ञापन
अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निरोधक अधिनियम में न्यायालय द्वारा संशोधन किए जाने के विरोध में जहां दलित समाज के एक गुट ने उग्र प्रदर्शन किया तो दूसरे गुट ने शांतिप्रिय ढंग से तालाब चौराहे के निकट मौन धरना देकर अपना विरोध दर्ज कराया। भारत बंद के आह्वान के बाद अमन सिंह, अंकित सोनी और संरक्षक योगेश कुमार ओके के नेतृत्व में एससी-एसटी समुदाय के लोगों ने मौन धरना दिया। एसडीएम सदर अरुण कुमार सिंह भी धरना स्थल पर मौजूद रहे।
विज्ञापन


कई बार धरना दे रहे लोगों को हटाने का प्रयास किया गया, लेकिन वह नहीं हटे। बाद में एसडीएम को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन दिया। ज्ञापन में कहा गया कि भारतीय गणराज्य में आज भी एससी-एसटी के लोगों की 90 फीसदी आबादी लाचारी, बेबसी की जिंदगी गुजार रही है। जातीय वैमनस्यता पूर्ण शोषण होने पर संविधान में निहित एससी-एसटी कानून से संरक्षणीय न्याय की उम्मीद बंधी थी, लेकिन केंद्र सरकार की षड्यंत्रकारी सोच और लापरवाही के चलते यह फैसला आया है। यदि केंद्र सरकार कमजोर वर्ग के लिए उच्च न्यायालय में अपील नहीं करती है तो यह माना जाएगा कि सरकार के इशारे पर ही संविधान में फेरबदल कर लोगों के कानूनी अधिकारों का हनन किया जा रहा है। 

धरना देने वालों में पूर्व विधायक गेंदालाल चौधरी, रामनारायण काके, मनोज सोनी, सुनीता सिंह, निर्मला देवी, सुनीता देवी, रेखा, दयाल साहब, चौ. विजेंद्र सिंह, भूपेंद्र सिंह, आनंद बाबू, आनंद बाबू, पंकज चौधरी, शिवदत्त दयाल, योगेंद्र सिंह, प्रवीन कुमार, राजा, कुलदीप राज सहित काफी लोग शामिल थे। 
विज्ञापन

 
जाटव एकता समिति ने भी सौंपा ज्ञापन 
हाथरस। जाटव एकता समिति के अध्यक्ष मूलचंद निम, महामंत्री ललित कुमार विमल, कोषाध्यक्ष डॉ. किशन प्रताप सिंह ने राष्ट्रपति के नाम उप जिला मजिस्ट्रेट को ज्ञापन दिया। ज्ञापन में कहा गया है कि अनुसूचित जाति, जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम में संशोधन के आदेश करने के बाद अभी तक केंद्र सरकार द्वारा पुनर्विचार याचिका दाखिल नहीं कर देश के करोड़ों दलितों के साथ नाइंसाफी की जा रही है। नई व्यवस्था से निश्चित ही पीड़ित को न्याय नहीं मिलेगा और उत्पीड़न सैकड़ों गुना गति से बढ़ेंगे। देश भर के दलितों में भय और रोष व्याप्त है। केंद्र सरकार को देश की जनता में कारण स्पष्ट कर देना चाहिए कि वह आधार कार्ड पर जाति का उल्लेख किन कारणों से नहीं कर रही है। 
-- 
रजक समाज ने भी सौंपा ज्ञापन 
हाथरस। उत्तर प्रदेश युवा रजक महासभा के प्रदेश अध्यक्ष और सपा नेता रामनारायण काके ने अपने दिवाकर समाज और एससी-एसटी वर्ग के लोगों के साथ अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम को पूर्व की भांति पुन: लागू कराने के संबंध में एसडीएम को ज्ञापन सौंपा। इस अवसर पर राधेश्याम केथिया, विष्णु दयाल, रमेश चंद्र भारती, सुनील दिवाकर, अशोक कुमार दिवाकर, रामभरोसे दिवाकर, डॉ. बनी सिंह दिवाकर, कन्हैया लाल भारती, हाकिम भारती, रेशमपाल दिवाकर, राजेंद्र प्रसाद दिवाकर, सोहन लाल दिवाकर, प्रेमपाल दिवाकर, सत्यवीर दिवाकर आदि शामिल थे। 
-- 

सासनी में जुलूस निकाल सौंपा ज्ञापन 
सासनी। एससी-एसटी समुदाय के लोगों ने एकत्रित होकर कस्बे में जलूस निकाला राष्ट्रपति के नाम एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर अधिनियम को पूर्व की भांति प्रभावी करने की मांग की। कस्बे में पारस टॉकिज के निकट एकत्रित हुए प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और जुलूस निकाला। इसके बाद तहसील पहुंचकर ज्ञापन सौंपा। जुलूस और ज्ञापन देने वालों में ज्ञापन देने वालों में महेंद्र पाल सिंह, केपी सुमन, रमेश चंद्र दिनेश, मेघ सिंह, केएस बिधाता, संत कुमार, मोती राम फौजी, अमर सिंह, डॉ. सतीश चंद्र, देवप्रकाश सागर, रघुवर दयाल, वेदपाल कनाडिया, संजीव कुमार, गिर्राज सिंह, राजपाल सिंह, रविकांत, चंद्रपाल सैलानी, निरंजन लाल पतरौल सहित सैकड़ों लोग शामिल थे। 
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें