एक किशोरी के अपहरण एवं उससे दुष्कर्म के आरोपी को अपर जिला एवं सत्र न्यायालय में विभिन्न धाराओं के तहत दस वर्ष के कारावास एवं दस हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई गई। अर्थदंड अदा नहीं करने पर उसे पांच माह का अतिरिक्त कारावास भोगना होगा।
कोतवाली चंदपा पुलिस को दी गई तहरीर में पीड़िता के पिता ने आरोप लगाया था कि उसकी नाबालिग पुत्री 22 अप्रैल 2013 को सुबह करीब 10 बजे घर से मंदिर में दर्शन के लिए गई थी। इस दौरान दिगंबर बहला-फुसलाकर उसका अपहरण कर ले गया। बाद में पुलिस ने बेटी को तलाश कर बरामद कर लिया, लेकिन आरोपी भाग गया। पुलिस ने मामले में आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया।
सुनवाई के दौरान वादी की ओर से एडीजीसी एसएस चौहान ने पीड़िता के स्कूल की प्रधानाचार्य को न्यायालय में विद्यालय के रिकॉर्ड सहित प्रस्तुत किया। इस रिकार्ड से घटना के समय किशोरी की उम्र 14 वर्ष होने की पुष्टि हुई। आरोपी का पक्ष सुनने के बाद अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश एफटीसी प्रथम सुरेंद्र मोहन सहाय ने अभियुक्त को धारा 363 में पांच वर्ष की कैद और दो हजार रुपये अर्थदंड, धारा 366 में सात वर्ष का कारावास एवं तीन हजार रुपये अर्थदंड, धारा 376 में दस वर्ष का कारावास एवं पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। यह भी निर्देश दिया कि सभी सजाएं साथ चलेंगी। अर्थदंड अदा नहीं करने पर अभियुक्त को पांच माह का अतिरिक्त कारावास भी भोगना होगा।