हाथरस। वन विभाग में 49 कर्मचारियों के नियमितीकरण की प्रक्रिया सवालों के घेरे में है। वर्ष 2010 में तत्कालीन अधिकारियों ने इन 49 कर्मियों का जो विनियमितीकरण किया गया, उसे विभागीय टीम ने ही अपनी जांच में त्रुटिपूर्ण पाया है।
दरअसल, इस संबंध में न्यायालय में दाखिल की गई याचिका लक्ष्मीचंद बनाम एनके जानू में प्रभागीय वनाधिकारी हाथरस एके कश्यप से सत्यापन रिपोर्ट मांगी गई थी। जांच के बाद डीएफओ ने विनियमितीकरण को त्रुटिपूर्ण बताते हुए अपनी रिपोर्ट न्यायालय को भेज दी है।
न्यायालय को डीएफओ एके कश्यप द्वारा भेजी गई सत्यापन रिपोर्ट ने वन विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों में खलबली मचा दी है। हालात यह हैं कि इस सत्यापन के त्रुटिपूर्ण पाए जाने के बाद विभाग के कई आला अधिकारियों के संबंधियों की नौकरी पर खतरा मंडरा रहा है।
इसकी भनक लगते ही वन विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी प्रभागीय वनाधिकारी के खिलाफ सामूहिक अवकाश पर जाने का मन बना रहे हैं। शासन और न्यायालय के आदेश मिलने के बाद तत्कालीन डीएफओ ने विनियमितीकरण के लिए न्यायालय में प्रस्तुत की गई वरिष्ठता सूची के साथ एक शपथ पत्र भी दाखिल किया था, जो परीक्षण के दौरान उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार त्रुटिपूर्ण पाया गया है।
सत्यापन करने वाले अधिकारियों में प्रभागीय वनाधिकारी एके कश्यप के साथ क्षेत्रीय वन अधिकारी सादाबाद गौतम सिंह, लेखा प्रभारी हाथरस अनिल कुमार तिवारी, अधिष्ठान प्रभारी हाथरस कुवंरपाल सिंह भी शामिल थे। इनके हस्ताक्षरों से यह रिपोर्ट न्यायालय को भेजी गई है।
मेरे द्वारा जो जांच रिपोर्ट न्यायालय को भेजी गई है, उसकी जानकारी होने के बाद मुझ पर दवाब बनाने के लिए कर्मचारी तरह-तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं। जांच में इन कर्मियों का नियमितीकरण त्रुटिपूर्ण पाया गया है।
-एके कश्यप, डीएफओ हाथरस