दो रेलवे कर्मियों की मौत पर रोते बिलखते परिजन।
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सहपऊ (हाथरस)। जलेसर रोड रेलवे स्टेशन के पास ट्रेन के चपेट में आने के बाद हुई दो रेलवे कर्मियों की मौत के मामले में रेलवे एवं जीआरपी की लापरवाही साफ झलकती दिखाई दे रही है। नई दिल्ली से गोरखपुर को जाने वाले वाली गोरखधाम एक्सप्रेस जलेसर रोड से रात के करीब साढ़े 11 बजे के आसपास यहां से गुजरती है। गाड़ी के जलेसर रोड स्टेशन पास करने के बाद कुछ ही देर में कोहरे के कारण दो रेल कर्मी ट्रेन से टकरा जाते हैं। दो लोगों के ट्रेन से टकराने की आवाज ट्रेन के ड्राइवर ने सुनी एवं इसकी सूचना उसके आगे पड़ने वाले स्टेशन चमरौला के स्टेशन मास्टर को दी।
जलेसर रोड से चमरौला तक सुपर फास्ट ट्रेनों पहुंचने में पांच मिनट से कम लगता है। चमरौला स्टेशन मास्टर द्वारा जलेसर रोड स्टेशन मास्टर को फोन पर सूचना देने में भी कम समय लगा होगा। रात के समय जलेसर रोड पर तैनात स्टेशन मास्टर ने पहले तो वहां से गुजरने रीवा सुपर फास्ट के ड्राइवर को वहां देख लेने का निर्देश देना और इसके बाद रीवा एक्सप्रेस के ड्राइवर द्वारा दोबारा चमरौला स्टेशन मास्टर को किसी के दिखाई नहीं देने की सूचना देने पर रेलवे वाले और भी लापरवाह हो गए।
इसके बाद जलेसर रोड के स्टेशन मास्टर ने मौखिक रूप से जीआरपी एवं अन्य रेलवे कर्मचारियों को घटनास्थल पर देखने के लिए भेजने में समय इसी प्रकार व्यतीत कर दिया। दोनों के शवों को देखकर ऐसा महसूस होता था कि ट्रेन से टकराने के बाद वह दोनों काफी देर तक घायल अवस्था में पड़े रहे थे। दोनों के शवों पर चोट के निशान थे एवं घटनास्थल पर काफी खून भी पड़ा था। स्टेशन मास्टर द्वारा भेजे गए रेलवे कर्मचारी एवं जीआरपी के जवानों ने ट्रेन के दुर्घटनाग्रस्त होने की बात को ध्यान में रखते हुए वहां रैकी की, न कि ट्रेन से किसी इंसान के टकराने के बिंदु पर। यदि वह इस बात पर ध्यान देते तो रात में ही दोनों कर्मी के साथ दुर्घटना होने की घटना की जानकारी रेलवे को मिल जाती और समय से उन दोनों का इलाज हो सकता था। उन सभी ने रेलवे लाइन पर ही देखा। उसके आसपास देखने की हिम्मत नहीं जुटाई। यदि रात के समय ही लाइन के आसपास खोज लिया जाता तो दोनों रेलवे कर्मियों की जान बच सकती थी।