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अपहरण व हत्या के दो आरोपियों को उम्रकैद

Mon, 31 Jul 2017 11:42 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो हाथरस। 
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एडीजे द्वितीय एसएन त्रिपाठी के न्यायालय ने अपहरण एवं हत्या के दो आरोपियों को दोषी माना है। दोनों को उम्रकैद एवं दो लाख बीस हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। न्यायालय ने यह भी व्यवस्था दी है कि जुर्माना अदा किए जाने पर 70 प्रतिशत धनराशि मृतक के माता-पिता को दी जाय। जेल में बिताई गई अवधि सजा में शामिल होगी। 
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कोतवाली सासनी पुलिस को तहरीर देते हुए महेश गिरी पुत्र रघुवीर गिरी निवासी ग्राम ततारपुर-छौंक ने आरोप लगाए कि 5जून 2011 को सुबह 9 बजे उसका पुत्र मोहित गिरी उम्र करीब 15 वर्ष शौच करने गया था। वह वापस लौटकर नहीं आया। उसके द्वारा मोहित की गुमशुदगी की सूचना 7 जून 2011 को पुलिस को दी। उसने अपने पुत्र की काफी तलाश की। इस दौरान उसे पता लगा कि उसके पुत्र का अपहरण रामकुमार पुत्र किशनलाल निवासी ततारपुर व विनीत उर्फ चुनमुना पुत्र रमेशचंद उपाध्याय निवासी ततारपुर कोतवाली सासनी ने कर लिया है।

उसके गांव के देवेंद्र पुत्र प्रताप सिंह ने बताया कि उसने उसके पुत्र मोहित गिरी उर्फ सनी को रामकुमार व विनीत उर्फ चुनमुना के साथ 5 जून 2011 को गांव से बाहर जाते हुए देखा है। उसे आशंका है कि उसके पुत्र के साथ हत्या जैसी कोई अनहोनी घटना न कर दें। पुलिस ने जब इस मामले की छानबीन की और इसमें रमेशचंद को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पूछताछ के बाद रमेश की निशानदेही पर घटना के 22 दिन बाद उसी के खेत में मोहित के शव की हड्डियां बरामद हुईं। पुलिस ने जांच के बाद आईपीसी की धारा 147,364,302,201 के तहत 18 दिसंबर 2012 में आरोप पत्र दाखिल किया।
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इस आरोप पत्र में विनीत कुमार उर्फ चुनमुन, नवनीत कुमार, महीपाल सिंह, रमेशचंद, रामकुमार उर्फ रामू, अवधेश के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। वहीं, टिकुला उर्फ भरत व कान्हा उर्फ गौरव के नाबालिग होने के कारण किशोर न्याय बोर्ड में अलग से आरोप पत्र प्रस्तुत किया गया। मुकद्दमे की सुनवाई के दौरान विनीत उर्फ चुनमुना की मौत हो गई। वहीं, नवनीत कुमार, महीपाल निवासी गांव ततारपुर छौंक एवं अवधेश कुमार निवासी चांचपुर भटेला थाना चंदपा के खिलाफ अभियो

जन की ओर से पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत नहीं दिए जा सके। जिससे इन तीन आरोपियों को न्यायालय ने दोषमुक्त करार दिया। उधर, रमेशचंद व रामकुमार उर्फ रामू निवासी ततारपुर छौंक को धारा 147 के तहत तो बरी कर दिया गया। जबकि धारा 302, 201 एवं 364 के तहत दोष सिद्ध माना गया। दोनों को धारा 364 में सश्रम आजीवन कारावास व 40-40 हजार अर्थदंड, धारा 302 में सश्रम आजीवन कारावास व 40-40 हजार अर्थदंड व धारा 201 में तीन-तीन वर्ष का कारावास एवं 30-30 हजार रुपये अर्थदंड दिया है। वादी की ओर से पैरवी एडीजीसी राजेंद्र वार्ष्णेय व अधिवक्ता पवन शर्मा ने की।  
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