बीएच ऑयल मिल रोड पर स्वरूपानंद सरस्वती का पुतला फूंकते जाटव समाज के लोग।
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हाथरस। जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती द्वारा दलितों को रामायण पढ़ने, जय भीम नहीं बोलने और आरक्षण समाप्त करने का विवादित बयान दिए जाने से दलित समाज के लोगों में रोष व्याप्त है। जाटव एकता समिति के अध्यक्ष मूलचंद्र निम के नेतृत्व में बीएच ऑयल मिल रोड पर समाज के लोगों ने शंकराचार्य का पुतला दहन किया।
लोगों ने जय भी कहना है, जय भीम का नारा है भारत देश हमारा आदि गगनभेदी नारे भी लगाए। निम ने कहा कि भारत का सबसे बड़ा ग्रंथ भारतीय संविधान है, उसके तहत देश चलना चाहिए। लल्लनबाबू एडवोकेट ने कहा कि शंकराचार्य आरक्षण का राग अलाप कर सवर्ण दलित दंगा कराना चाहते हैं। ऐसे व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा कायम होना चाहिए। रामकिशोर बौद्ध ने कहा कि दलित इंजीनियर, डॉक्टर, जज और शिक्षकों की योग्यता पर अंगुली उठाना उचित नहीं है। ललित कुमार विमल ने भी विचार व्यक्त किए। पुतला दहन करने वालों में पन्नालाल बौद्ध, सीताराम राजेश, बौ. ठाकुरदास, बाबूलाल अंबेडकर, विजय सिंह अंबेडकर, कपूरचंद्र जाटव, मदनलाल कोरी, हरी सिंह वाल्मीकि, रामबाबू लाल दिवाकर आदि शामिल थे।