अपर जिला जज द्वितीय एसएन त्रिपाठी के न्यायालय ने दलित किशोर की हत्या के एक बहुचर्चित मामले में दो आरोपियों बनवारी लाल और उसकी पत्नी नीलम को दोषी करार दिया है। दोनों दोषियों को सश्रम आजीवन कारावास एवं एक-एक लाख रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।
अर्थदंड अदा नहीं करने की स्थिति में एक-एक वर्ष के अतिरिक्त कारावास का निर्णय दिया है। अभियुक्तों की जेल में बिताई अवधि भी सजा में समायोजित की जाएगी। अर्थदंड का 70 प्रतिशत मृतका के परिजनों को प्रतिकर के रूप में दिए जाने का प्राविधान किया है।
वादी सुनहरीलाल निवासी मोहल्ला मंदिर वाला थाना सादाबाद पुलिस को तहरीर दी, जिसमें आरोप लगाया कि उसका पुत्र शशि कपूर आगरा रोड चुंगी सादाबाद के निकट स्कूटर मिस्त्री का काम करता था। नौ जनवरी 2006 को शाम छह बजे के लगभग शशि कपूर को दुकान से विपिन कुमार निवासी भगवती नगर थाना सादाबाद बुलाकर अपने साथ ले गए। रास्ते में मिले विष्णु पुत्र करन सिंह ने शशि कपूर को विपिन कुमार के साथ जाते हुए देखा था। शाम को करीब सात बजे विजय निवासी मोहल्ला कैथवाला सादाबाद ने शशि कपूर को विपिन कुमार के घर पर उसके घर वालों से बातें करते देखा था। उसके बाद शशि कपूर लौटकर घर नहीं आया।
सुनहरीलाल ने कहा है कि विपिन कुमार और उसके पिता बनवारीलाल ने अपने रिश्तेदार राजेंद्र प्रसाद शर्मा, रविधेश कुमार, रविधेश कुमार के छोटे भाई निवासी आनंद नगर कस्बा सादाबाद के साथ मिलकर एक षड्यंत्र के तहत साजिश रचकर प्रार्थी के पुत्र की हत्या कर शव को हुसैनी रजवशहा के पास डाल दिया। पुलिस ने जांच के बाद बनवारीलाल, नीलम और बबली के खिलाफ आईपीसी की धारा 302,201,120बी एवं एससीएसटी एक्ट के तहत 24 फरवरी 2006 में आरोप पत्र दाखिल किया था। वादी की ओर से पैरवी इस मामले में एडीजीसी राजेंद्र वार्ष्णेय एवं पीयूष वशिष्ठ ने संयुक्त रूप से की।