हाथरस। जिले में वह कौन से इलाके हैं, जहां ज्यादा अपराध होता है? इसका जवाब जल्द ही जिले की पुलिस के पास होगा। यूपी पुलिस ने देश में पहली बार वेब बेस्ड क्राइम मैपिंग सिस्टम के जरिए हर जिले में क्राइम का खाका खींचने की तैयारी शुरू कर दी है। जितने भी मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं, उनमें घटनास्थल का लैटीट्यूड और लांगीट्यूड (भौगोलिक स्थिति) पुलिस पता कर रही है। इतना ही नहीं पिछले तीन साल में दर्ज मुकदमों में भी घटनास्थल की भौगोलिक स्थिति का भी रिकॉर्ड जुटाया जा रहा है। इसके बाद एक सॉफ्टवेयर की मदद से इस डाटा को गूगल मैप पर अपलोड कर दिया जाएगा। इस तकनीक की मदद से कुछ ही समय में जिले के ज्यादा क्राइम वाले प्वाइंट सामने आ सकेंगे। हर प्वाइंट की क्राइम हिस्ट्री एक क्लिक में सबके सामने होगी।
एसपी डॉ.अजयपाल के मुताबिक ऑनलाइन क्राइम मैपिंग के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि किन इलाकों में सबसे ज्यादा क्राइम होता है, किस तरह का क्राइम होता है, किस तरह का क्राइम ज्यादा होता है, क्राइम होने का मुख्य कारण क्या है। ऑनलाइन क्राइम मैपिंग सिस्टम के जरिए अपराधों पर लगाम कसने की तैयारी की जा रही है। इससे अपराध रोकने और उनका खुलासा करने में मदद मिलेगी। क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (सीआरी) इन अपराधों के मामलों की ऑनलाइन मैपिंग करेगा। एक ऐसा सॉफ्टवेयर विकसित किया गया है, इसकी मदद से जितने भी अपराध हो रहे हैं, उनको मैप पर प्लांट किया जाएगा, जिससे एक क्लिक पर उस क्षेत्र में घटने वाली समस्त घटनाएं प्रदर्शित हो जाएंगी। क्राइम को थानेवार दर्ज किया जाएगा। इसमें अपराध, अंजाम देने वाले की उम्र, स्टेटस और लोकेशन की भी जानकारी होगी, जिससे थानों के बीच के सीमा विवाद दूर हो सकेंगे। अपराधियों के आने-जाने के रास्ते और उनके क्राइम करने के ट्रेंड की भी जानकारी होगी। मालूम हो कि यूपी देश का पहला ऐसा राज्य है, जहां इसे लागू किया गया है। पहले फेज में कानपुर, मेरठ, आगरा और बरेली मंडल को शामिल किया गया था। अब इसे पूरे प्रदेश में लागू किया गया है। डीजीपी और हर जोन के आईजी पर इस सिस्टम की मॉनीटरिंग का जिम्मा है।