आग बुझाने हाथरस आ रही गाड़ी सादाबाद में दुर्घटनाग्रस्त
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो हाथरस
सादाबाद/हाथरस। मथुरा रोड पर रुई की फैक्ट्री में लगी भीषण आग के बाद सादाबाद से आ रही दमकल बढ़ार चौराहे पर हादसे का शिकार हो गई। आलू से भरे ट्रैक्टर-ट्रॉला से टकराने के बाद दमकल सड़क किनारे खड़े आलू से भरे ट्रक में जा घुसी। इस हादसे में पांच दमकल कर्मी और एक ट्रैक्टर चालक गंभीर रूप से घायल हो गए। सभी घायलों को उपचार के लिए पहले सादाबाद सीएचसी ले जाया गया। जहां से उन्हें आगरा मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और काफी भीड़ जमा हो गई।
हादसा इतना जबर्दस्त था कि दमकल के परखच्चे उड़ गए। दमकल का कुछ हिस्सा ट्रैक्टर में फंस गया। मौके पर सादाबाद, चंदपा, सदर कोतवाली और हाथरस गेट पुलिस बल पहुंचा। सीओ सादाबाद नरेंद्र देव और एफएसओ कुंवर सिंह भी मौके पर पहुंचे और दमकल में फंसे घायल फायर ब्रिगेड कर्मियों को निकालने में जुट गए। घायलों को निकालने के लिए दमकल के क्षतिग्रस्त हिस्सों को काटना पड़ा। दमकल के चालक प्रहलाद सिंह को काफी मशक्कत के बाद निकाला जा सका। हादसे के बाद सादाबाद सीएचसी को अलर्ट कर दिया गया। प्रहलाद सिंह की गंभीर हालत देखते हुए तुरंत रेफर किया गया। वहीं हादसे में घायल हेड कांस्टेबल सुंदर सिंह, सिपाही चंद्रमोहन पाठक और उमेश चंद्र, होमगार्ड रूप किशोर और ट्रैक्टर चालक को कुछ देर बाद रेफर कर दिया गया। खबर लिखने तक ट्रैक्टर चालक का नाम-पता मालूम नहीं हो सका था।
पेट्रोल पंप से पानी लेकर बुझाई आग
फैक्ट्री में लगी आग को बुझाने में दमकल को काफी मुश्किल हुई। ट्रैक के दूसरी ओर होने के कारण यहां दमकल का पहुंचना पहले से ही कठिन था। वहीं पानी का कोई इंतजाम नहीं होने से आग बुझाने में दिक्कत हुई। फैक्ट्री के पास मौजूद एक पेट्रोल पंप से पानी भरकर दमकलों ने आग बुझाई। इसके अलावा मुरसान और हाथरस शहर से भी दमकलों को कई बार पानी भरकर लाना पड़ा।
अंधेरे ने अटकाया रोड़ा
फैक्ट्री में आग लगी तो थी लेकिन इसमें लपटें नहीं उठ रहीं थीं। जलती रुई केवल धधक रही थी। अंधेरा होने के कारण ज्यादा कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। सड़क पर भी अंधेरा छाया था। अंधेरे के कारण आग लगने पर पुलिसकर्मियों और फायर ब्रिगेड की गाड़ियों के लिए मुश्किल हुई। मौके पर पहुंचे लोगों ने सड़क पर रोशनी नहीं होने के लिए प्रशासन को जमकर कोसा भी।
रात को मजदूर नहीं मिले
रुई की कुछ गांठे पानी डालने के बाद भी सुलग रही थीं। ऐसे में मालिकों की कोशिश इन गांठों को अलग कर बची हुई रुई को जलने से बचाने की थी। इसके लिए मजदूरों की तलाश की गई लेकिन मजदूर नहीं मिले और मालिक हाथ मलते रह गए।