जिले में राशन के खाद्यान्न की कालाबाजारी की जड़ें खोजने में विभाग के अधिकारी कामयाब हो गए है। यहां पूर्ति अधिकारी द्वारा बनाई गई तीनों जांच टीमों ने अपनी रिपोर्ट दे दी है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार अनाज घोटाले की जड़ें सादाबाद क्षेत्र से जुड़ी हैं।
यहां के दो कोटेदारों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए विभागीय अधिकारियों ने पहल शुरू कर दी है। वहीं, एक कम्प्यूटर ऑपरेटर के खिलाफ भी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। विभाग की ओर से इन तीनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। अभी फिलहाल अधिकारियों ने कोटेदारों के नामों को गुप्त रखा है। इसके पीछे कम्प्यूटर ऑपरेटर राकेश प्रबल को मास्टरमाइंड बताया जा रहा है।
लखनऊ स्तर से इस जिले को भी कालाबाजारी के लिए जांच के घेरे में ले लिया गया था। यहां पांच आधार कार्डों के नंबर पर 1065 राशन कार्ड चल रहे थे। यह मामला सुर्खियों में आते ही स्थानीय स्तर पर विभागीय अधिकारियों में खलबली मच गई थी।
पूर्ति अधिकारी ने इस मामले में तीन जांच कमेटी बनाकर जांच शुरू करा दी थी। प्रथम दृष्टया जांच में सादाबाद क्षेत्र के दो कोटेदारों के नाम निकलकर सामने आए है। कोटेदारों में इस कार्रवाई हडकंप मचा हुआ है।
हालांकि इन आधार नंबरों का डाटा विभाग के कार्यालय में बैठकर ही फीड़ किया गया था। यह डाटा कम्प्यूटर ऑपरेटर राकेश प्रबल ने ही फीड़ किया था। यह ऑपरेटर शासन से नामित संस्था केडीएस प्राइवेट लिमिटेड के द्वारा ही विभाग में आधार फीडिंग़ के लिए तैनात किया गया था। अभी जांच अधिकारी अन्य कोटेदारों के रिकार्ड को खंगालने में लगे हुए है।