फायरिंग के दौरान घायल हुए मीडिया कर्मी को अलीगढ़ ले जाते लोग।
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विधायक पुत्र द्वारा विधायक की रायफल से फायरिंग की गूंज घटना के बाद शासन तक पहुंची। सूत्रों की मानें तो इसी के बाद शासन के निर्देश पर रिपोर्ट दर्ज करने की कार्रवाई हुई। शुरू में स्थानीय पुलिस प्रशासन विधायक के पुत्र दिनेश के खिलाफ किसी भी तरह की कार्रवाई से घंटों बचता रहा। सूत्रों की मानें तो इस दौरान विधायक विरोधी गुट भी सक्रिय हो गया। मामला ऊपर पहुंच गया और तब जाकर विधायक के बेटे के खिलाफ पुलिस ने थाना हाथरस गेट में अपनी ओर से रिपोर्ट दर्ज की। यही नहीं पुलिस ने सात एंबुलेंस भी जब्त की, जोकि बागला जिला चिकित्सालय परिसर में अवैध रूप से खड़ी थी।
आरएसएस के कार्यक्रम में शुक्रवार को जब हर्ष फायरिंग में एक मीडियाकर्मी गंभीर रूप से घायल हुआ और विधायक हरिशंकर माहौर का बेटा चोटिल हुआ तो स्थानीय प्रशासन ने इसे बेहद हल्के में लिया। पुलिस को घटना की जानकारी भी मिल गई थी लेकिन काफी देरी से पुलिस जिला अस्पताल पहुंची, तब तक घायल को जिला अस्पताल से ले जाने की कार्रवाई की जा चुकी थी।
मामला चूंकि सत्ताधारी पार्टी के विधायक का था तो ऐसे में पुलिस प्रशासन जानबूझकर मामले में कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं कर रहा था। विधायक भी निश्चित थे। उन्होंने खुद पूछने पर बताया कि उनके बेटे ने जब उनकी रायफल से फायरिंग की तो मीडियाकर्मी व उनका बेटा घायल हुआ है। उनका यह भी कहना था कि सब खुशी-खुशी फायरिंग कर रहे थे। इधर,जब इस मामले में एएसपी से पूछा गया तो वह यही कहते दिखे कि पहले घटना को लेकर तहरीर तो मिले, तब कोई कार्रवाई होगी।
सूत्रों की मानें तो इस दौरान मामला शासन तक पहुंच गया। वहीं विधायक विरोधी गुट ने भी इस मामले को हवा दे दी। इसका परिणाम यह हुआ कि जो पुलिस प्रशासन किसी तहरीर के मिलने का इंतजार कर पूरे मामले को टाल रहा था, उसने खुद ही इस मामले में रिपोर्ट दर्ज कर ली। माना जा रहा है कि जल्द ही विधायक की रायफल का लाइसेंस भी निरस्त हो सकता है।
हाथरस गेट थाने के एसआई घनेंद्र शर्मा ने इस मामले में विधायक के बेटे पर आर्म्स एक्ट व अन्य धाराओं के तहत रिपोर्ट दर्ज की है। इसमें विधायक पुत्र दिनेश पर पर आर्म्स के नियमों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया गया है। सूत्रों की मानें तो विधायक की रायफल का लाइसेंस भी निरस्त किया जा सकता है।