हाथरस। सादाबाद के सपा विधायक देवेंद्र अग्रवाल को हाईकोर्ट ने अंतरिम राहत दे दी है। सहपऊ में साल 2008 में धोखाधड़ी से फर्जी तेल डिपो चलाने के आरोप में विधायक के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया था। इस मामले में सादाबाद के ज्युडिशियल मजिस्ट्रेट ने 27 जुलाई को विधायक के विरुद्ध गैर जमानती वारंट जारी कर दिया था, जिसके बाद से पुलिस विधायक को ढूंढने की कोशिश कर रही थी।
वारंट जारी होने के 15 दिन बाद विधायक को कोर्ट से राहत मिल सकी। कोर्ट से जारी वारंट के कई दिनाें तक थाना पुलिस को नहीं मिलने को लेकर भी पुलिस घिरी नजर आई। नौ दिन बाद कचहरी से चला वारंट सदर कोतवाली पहुंचा। बाकी के दिन पुलिस ने विधायक को ढूंढने में लगा दिए।
पुलिस के मुताबिक विधायक के बिसाना और हाथरस स्थित आवासों पर कई बाद दबिश दी गई, लेकिन वह नहीं मिले। इस बीच विधायक के विरोधी जिला पंचायत सदस्य रामेश्वर उपाध्याय ने यह कहकर पुलिस और प्रशासन को घेरते हुए आरोप लगाया कि गैर जमानती वारंट जारी होने के बाद भी विधायक सादाबाद में सार्वजनिक कार्यक्रमों में हिस्सा ले रहे हैं।
वह पुलिस को अपनी ताकत दिखा रहे हैं और पुलिस कुछ नहीं करना चाह रही। सपा विधायक को सोमवार को हाईकोर्ट ने यह कहकर राहत दे दी कि अगली सुनवाई तक देवेंद्र अग्रवाल के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं की जाए। साथ ही कोर्ट ने इस मामले में देवेंद्र अग्रवाल समेत सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर चार हफ्ते में अपना जवाब दाखिल करने को कहा है।
न्याय की जीत, बेईमानों की हार: देवेंद्र
विधायक देवेंद्र अग्रवाल का कहना है कि न्यायालय का यह आदेश न्याय की जीत है और बेईमानों की हार है। बकौल विधायक उनके खिलाफ यह मुकदमा 2008 में बसपा शासन के दौरान राजनीतिक साजिश के तहत पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय के इशारे पर दर्ज किया गया था। पूर्व मंत्री और उनका परिवार हमेशा से मेरे खिलाफ साजिश रचता रहा है, लेकिन आज तक उनका कुछ बिगाड़ नहीं पाया। यह परिवार उनकी लोकप्रियता से घबरा गया है। वह कानूनी तरीके से अपनी लड़ाई लड़ेंगे और पूरी तरह जीतकर भी दिखाएंगे। उन्होंने कहा है कि उन्हें न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा है।