हाथरस। महिला सुरक्षा सप्ताह में नाबालिग लड़कियों के साथ दुष्कर्म के दो मामले सामने आए। इसमें से एक मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में भी रही। महिलाओं के साथ बढ़ते अपराधों की रोकथाम के लिए पुलिस अब कम्युनिटी पुलिसिंग पर जोर देने की बात कह रही है। एसपी का कहना है कि इस पुलिसिंग की मदद से नशा, जुआ और सट्टे जैसी सामाजिक बुराइयों को दूर करने में भी मदद मिलेगी।
एसपी के मुताबिक नाबालिग लड़कियों के साथ दुष्कर्म की घटनाएं समाज एवं शासन के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। इस तरह के नृशंस अपराधों की रोकथाम के लिए यह जरूरी है कि संभावित असुरक्षित नाबालिग लड़कियों के अभिभावकों को उनके आसपास मंडराते खतरों से सावधान किया जाए। जिले के नगरीय क्षेत्रों, स्लम एरिया और पुरानी और अविकसित नगरीय बस्तियों जहां नाबालिग बच्चियां आसानी से ऐसे अपराधों की शिकार हो सकती हैं।
कम्युनिटी पुलिसिंग के माध्यम से थानाध्यक्ष व संबंधित पुलिस चौकी प्रभारी के माध्यम से वहां के लोगों के बीच जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। एसपी ने बताया कि इसके लिए थाना और पुलिस चौकी स्तर पर क्षेत्र के सक्रिय नागरिकों की समितियां गठित की जाएंगी और उसकी नियमित रूप से बैठकें की जाएंगी। इस अभियान में महिला शिक्षिकाओं, आशा बहुओं तथा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की सहभागिता भी होगी।
ये लोग नाबालिग बच्चियों की सुरक्षा के लिए अभिभावकों से संपर्क बनाए रखेंगी और उन्हें सावधान रहने की सलाह देती रहेंगी। समितियों के सदस्यों को प्रेरित किया जाएगा कि वे मोहल्लों के असामाजिक तत्वों, शोहदों और आवारा घूमने वाले मनचलों पर सतर्क निगाह रखेंगी और उनकी गतिविधियां संदिग्ध दिखने पर संबंधित पुलिस अधिकारी को सूचित करेंगी।
एसपी ने बताया कि यह कार्रवाई नगरीय बस्तियों के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में भी होगी। ऐसी समितियों की बैठकों में ग्राम प्रधान, लेखपाल और ग्राम चौकीदार का दायित्व होगा कि वे ग्रामीणों को ऐसे अपराधों पर रोक लगाने और शोहदों पर निगाह रखने के लिए प्रेरित करेंगे। यह भी देखा गया है कि शहरों में काम करने वाले और पढ़ने वाले लड़के जब छुट्टियों में गांव जाते हैं तो ऐसे अपराधों में उनकी संलिप्तता की आशंका बनी रहती है। ऐसे में उन पर भी समिति नजर रखेगी।