आंगनबाडी कार्यकर्ता की दुर्घटना में मौत के बाद जिला अस्पताल में बिलखते परिजन।
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टेंपो से गिरकर घायल हुई एक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की मौत जिला अस्पताल की इमरजेंसी में उपचार के दौरान हो गई। कार्यकर्ता की मौत के बाद परिजनों ने इमरजेंसी में डॉक्टर पर गलत इंजेक्शन दिए जाने का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। परिजनों ने कहा कि कार्यकर्ता की हालत ज्यादा गंभीर नहीं थी। उन्हें रेफर किया जा रहा था।
इंजेक्शन दिए जाने के बाद बहुत तेजी से कार्यकर्ता की हालत बिगड़ गई और चंद मिनटों में ही उनकी मौत हो गई। हंगामे की सूचना पर जिला अस्पताल में पुलिस और एसडीएम सदर अरुण कुमार भी पहुंच गए। कार्रवाई का आश्वासन मिलने के बाद कार्यकर्ता के परिजन शांत हो गए।
मुरसान क्षेत्र के गांव दयालपुर की रहने वाली 45 वर्षीय शीला देवी पत्नी रमेश चंद्र बुधवार सुबह कलक्ट्रेट में जारी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के धरना-प्रदर्शन में शामिल होने के लिए टेंपो से वहां पहुंची। शीला देवी के टेंपो से उतरने से पहले ही टेंपो चल दिया। इससे शीला देवी गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गईं। उनके सिर में गहरी चोट आई थी। धरना स्थल पर मौजूद दूसरे कार्यकर्ता उन्हें सदर कोतवाली के सामने एक निजी अस्पताल में ले गए जहां डॉक्टर ने उपचार करने से इंकार कर दिया।
इसके बाद कार्यकर्ता शीला देवी को बागला जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां हेड इंजरी होने के कारण उन्हें अलीगढ़ रेफर कर दिया गया। एंबुलेंस को भी बुला लिया गया। इसी बीच डॉक्टर ने फर्स्ट एड देने के उद्देश्य से एक इंजेक्शन शीला देवी को लगवाया। इसके कुछ देर बाद जब शीला देवी की मौत हो गई तो उनके पति ने यह कहकर हंगामा खड़ा कर दिया कि मौत गलत इंजेक्शन देने से हुई।
इसके बाद परिजन कार्रवाई और मुआवजे की मांग करने लगे। मौके पर पहुंचे एसडीएम अरुण कुमार ने परिजनों को शांत करने के बाद बताया कि शीला देवी की मौत उपचार में लापरवाही के कारण नहीं हुई है। डॉक्टर ने शीला देवी को प्राथमिक उपचार दिया था। सिर में गहरी चोट होने के कारण उनकी मौत हुई। परिजनों का आर्थिक सहयोग करने की कोशिश की जाएगी।