हाथरस। चीरघर के पीछे शुक्रवार रात कोतवाली हाथरस गेट पुलिस को मिले नरकंकाल की पहचान उसके कपड़ों से कुछ ही घंटों बाद जब हुई तो सदर कोतवाली पुलिस के होश फाख्ता हो गए। सदर कोतवाली पुलिस 23 मई से लापता कांशीराम कॉलोनी के जिस छात्र की तलाश में जुटी हुई थी, कंकाल उसी छात्र का था। पुलिस को अंदेशा है कि हत्यारों ने ई-रिक्शा लूटने के बाद अंकित की हत्या कर दी और शव की शिनाख्त नहीं हो सके इसके लिए पोस्टमार्टम हाउस की दीवार के पीछे अंकित के चेहरे समेत पूरे शरीर को तेजाब से जला दिया गया। तेजाब से जलने के कारण ही शव कंकाल में बदल गया।
कंकाल को चुपचाप चीरघर के पास प्रतीक्षालय में रखकर आरोपी चले गए जहां से इसे कुत्तों ने खींच लिया और झाड़ियों में ले गए। अंकित की हत्या की गुत्थी सुलझाने में एसओजी और हाथरस गेट पुलिस सदर कोतवाली पुलिस की मदद कर रही है। पुलिस ने शक के आधार पर दो लोगों को हिरासत में लिया है। इनमें से एक पर लापता अंकित का मोबाइल फोन भी बरामद हुआ है।
अंकित 23 मई को सुबह अपने पिता धर्मपाल का ई-रिक्शा लेकर घर से निकला था। तभी से उसका पता नहीं चल रहा था। परिजनों ने 23 मई को अंकित का फोन बंद जाने पर कोतवाली पुलिस से शिकायत की थी। पुलिस ने 23 मई को ही उसकी गुमशुदगी दर्ज कर ली थी। परिजन तभी से अंकित को तलाश रहे थे। इस बीच उन्होंने सदर कोतवाली पुलिस पर अंकित की खोजबीन में लापरवाही के आरोप भी लगाए थे।
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हाथरस गेट पुलिस को मिला था कंकाल
शुक्रवार रात को कोतवाली हाथरस गेट पुलिस को चीरघर के पास एक शव को कुत्तों के खींचकर ले जाने की सूचना मिली थी। पुलिस जब मौके पर पहुंची तो वहां शव नहीं बल्कि एक नरकंकाल था। कंकाल के ऊपरी हिस्से पर जरा भी मांस नहीं था। कंकाल पर कपड़े मौजूद थे जो गीले थे। इससे पता चल रहा था कि कंकाल को किसी नहर या नाले से निकालकर यहां लाया गया था। जांच में चीरघर के पास बने प्रतीक्षालय में पहले शव को रखे जाने और फिर सीढ़ियों से उसे नीचे घसीटकर झाड़ियों तक ले जाने के निशान भी मिले। इससे भी किसी इंसान के शव को यहां लाकर प्रतीक्षालय में रखने का अंदेशा हुआ।
गुमशुदा लोगों के कपड़ों से किया मिलान
कोतवाली हाथरस गेट निरीक्षक रजनेश तिवारी देर रात छानबीन में जुटे रहे। जिलेभर में दर्ज सभी गुमशुदगियों के बारे में पता किया गया। गुमशुदा लोगों के कपड़ों के बारे में पता किया गया। सदर कोतवाली से लापता अंकित के कपड़े और नरकंकाल पर मौजूद मिले कपड़ों का रंग एक होने पर पुलिस का शक पक्का होने लगा। इसके बाद कोतवाली हाथरस गेट पुलिस ने अंकित के परिजनों को ले जाकर नरकंकाल की शिनाख्त कराई। देखने के लिए शव में हड्डियों के ढांचे के सिवाय कुछ भी नहीं बचा था लेकिन नरकंकाल पर मौजूद मिले अंकित के अंडरवियर ने परिजनों की आशंका को सच में बदल दिया। इसके बाद सदर कोतवाली पुलिस अंकित की हत्या की जांच की गुत्थी सुलझाने में जुट गई। पुलिस को शव के इतना जल्द कंकाल में बदल जाने पर हैरानी थी। एसपी घुले सुशील के निर्देश पर कोतवाली हाथरस गेट पुलिस, सदर कोतवाली पुलिस और एसओजी पूरे मामले की छानबीन में जुट गए।
परिजनों ने बरामद किया चश्मा, चप्पल, गमछा
कोतवाली पुलिस पर पहले से ही इस मामले में लापरवाही के आरोप परिजन लगा रहे थे। जांच-पड़ताल में भी पुलिस से भारी चूक हुई, लेकिन पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे अंकित के परिजनों ने पुलिस को अहम साक्ष्य इकट्ठा कर दिए। पोस्टमार्टम हाउस पर कोतवाली पुलिस ने उस जगह की बारीकी से जांच की थी जहां शव मिला था। इसके बाद जब परिजन वहां पहुंचे तो आसपास काफी दूर तक जाकर उन्होंने खुद जांच-पड़ताल की। घटनास्थल से कुछ ही दूर पर उन्हें अंकित की चप्पल, उसका चश्मा और गमछा पड़ा मिला। कपड़ों के अलावा इन तीनों की शव की शिनाख्त में अहम भूमिका थी। पुलिस की लापरवाही जांच में भारी पड़ सकती थी।
एक आरोपी पर मिला अंकित का फोन
कोतवाली पुलिस को अंकित के साथ अनहोनी का अंदेशा था। शुक्रवार को ही उसकी गुमशुदगी को अपहरण में तरमीम कर दिया गया था। पुलिस ने सर्विलांस के आधार पर 23 मई को अंकित की लोकेशन पता की। सुबह पौने नौ बजे अंकित का फोन बंद हो गया। इसके बाद रात आठ बजे उसमें दूसरी सिम डाली गई। जिस शख्स ने फोन में सिम डाली, उसे पुलिस ने पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया है। यह भी कांशीराम कॉलोनी का रहने वाला है और अंकित का पड़ोसी है। इस शख्स से पूछताछ के बाद एक और आरोपी को हिरासत में लिया गया है। पुलिस ने दोनों युवकों से पूछताछ कर रही है। आरोपियों से अंकित का फोन भी बरामद कर लिया गया है। पुलिस जल्द घटना से पर्दा हटाने की बात कह रही है।
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कई चालकों की हत्या की गुत्थी अनसुलझी
अभी तक ई-रिक्शा लूटने के बाद चालकों की हत्या करने के कई मामले सामने आ चुके हैं। अप्रैल में हाथरस गेट क्षेत्र से सुनील (30) पुत्र दुर्गाप्रसाद निवासी नगला चोखे को लुटेरों ने अपना शिकार बनाया था। सुनील खाना खाकर ई-रिक्शा लेकर काम पर चला गया था। इसके बाद वह लौटकर घर नहीं आया। इससे पहले मोहल्ला श्रीनगर निवासी सोनू उर्फ गौस मोहम्मद (18) पुत्र सगीर को भी लुटेरों ने अपना शिकार बनाया था। 18 जनवरी की दोपहर सोनू खाना खाकर घर से गया था, जिसके बाद नहीं लौटा। 23 जनवरी को कोटा रोड स्थित बंबा के पास उसका गला कटा शव मिला था। पिछले साल पांच नवंबर को कुछ इसी तरह लक्ष्मण (18) निवासी सुरंगपुरा का शव गांव तमना गढ़ी के अरहर के खेत में मिला था। इन दोनों मामलों से पुलिस अभी तक पर्दा नहीं हटा सकी है।