हसायन। निजी पैथॉलाजी से बुखार की गलत रिपोर्ट और झोलाछाप डाक्टरों का इलाज मरीजों पर भारी पड़ रहा है। तीन साल के एक मासूम की झोलाछाप चिकित्सक के इलाज में जान चली गई। रुपयों की लालच में झोलाछाप तब तक इलाज करता रहा जब तक बच्चे की हालत पूरी तरह बिगड़ नहीं गई।
गांव सैंगला निवासी होमगार्ड हरेंद्र सिंह के तीन वर्षीय बेटे रितिक को बुखार से हो गई। गांव के ही एक झोलाछाप डाक्टर के पास उसका इलाज चल रहा था। जब हालत गंभीर हो गई तब झोलाछाप डाक्टर ने इलाज से हाथ खड़े किए। आनन-फानन परिजन उसे लेकर हाथरस पहुंचे जहां गंभीर हालत होने से डाक्टर ने अलीगढ़ ले जाने की सलाह दी। अलीगढ़ में भी नर्सिंग होम में बच्चे को भर्ती करने से मना कर दिया गया। परिजन उसे लेकर आगरा गए किंतु तब तक इलाज के अभाव में उसकी मौत हो गई। शनिवार को बच्चे का शव गांव आया तो ग्रामीणों में मातम छा गया।