अमर उजाला ब्यूरो, सहपऊ।
कस्बे के आदर्श नारायण विद्यालय में मंगलवार को शिक्षक दिवस कार्यक्रम में शामिल होने के बाद लापता हुआ कक्षा तीन का छात्र एटा में मिल गया। वह अपने गांव लालपुर, जनपद एटा जाने के लिए बस में बैठकर चला गया था। एटा में बस स्टैंड पर सोकर उसने रात गुजारी। सुबह एक कंडक्टर ने उससे पूछताछ के बाद रिश्तेदार को सूचना दे दी और बच्चे को सकुशल घरवाले ले आए।
बता दें कि कक्षा तीन का छात्र शोभित कुमार (8 वर्ष) पुत्र कर्मेंद्र सिंह मूलरूप से एटा के गांव लालपुर का रहने वाला है। वह और उसका बड़ा भाई कस्बा सहपऊ में नाना बांकेलाल के यहां रहकर पढ़ाई कर रहे हैं। मंगलवार को शिक्षक दिवस कार्यक्रम में शामिल होने बच्चा स्कूल तो गया लेकिन वहां से वापस नहीं लौटा था। देर रात तक कोई खबर नहीं मिलने पर परिजनों ने उसकी गुमशुदगी दर्ज करा दी।
बुधवार सुबह एटा में शिकोहाबाद बस स्टैंड से बरामद करने के बाद परिजन उसे यहां लेकर आए। बच्चे ने कोतवाली पुलिस को बताया कि वह शिक्षक दिवस कार्यक्रम मनाने के बाद स्कूल ड्रेस में ही धर्मशाला चौराहे पर पहुंच गया। यहां से वह जलेसर जाने वाली बस में बैठ गया। जलेसर से उसने अवागढ़ जाने वाले बस पकड़ ली।
अवागढ़ से एटा जाने के लिए बस में बैठा लेकिन पैसे न होने के कारण कंडक्टर ने उसे बस से उतार दिया। वहां एक सिपाही ने बच्चे से रोने का कारण पूछा। बच्चे ने अपने गांव जाने की बात कही। इस पर सिपाही ने उसे 40 रुपये दिए और एटा जाने वाली बस में बैठा दिया। शाम के सात बजे वह एटा बस स्टैंड से पैदल-पैदल शिकोहाबाद वाले बस स्टैंड पर पहुंच गया। वहां एक तख्त पर सोकर उसने रात गुजारी।
सुबह होते ही एक कंडक्टर ने उसे देखा तो उसका पता पूछा। शोभित द्वारा बताए गए मोबाइल नंबर पर उसने फोन कर एटा निवासी एक रिश्तेदार को बुला लिया। बच्चे के मिलने के बाद परिजनों की जान में जान आई। शोभित के पिता और मामा एटा से बच्चे को लेकर सहपऊ कोतवाली आए। बच्चे का कहना था कि वह अपने गांव में रहकर पढ़ना चाहता है। कोतवाली प्रभारी अवधेश कुमार ने बच्चे से पूछताछ की उसे परिजनों के साथ घर को भेज दिया।
अनहोनी की आशंका से डरे रहे परिजन
जन्माष्टमी की रात्रि में मंदिर देखने गया एक बच्चा लापता हो गया था। सुबह उसका शव खेत में पड़ा मिला था। उसे तेजाब से जलाकर मारा गया था। ऐसी ही अनहोनी कि आशंका के चलते परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। सुबह उसके सकुशल मिल जाने की खबर के बाद परिजनों की जान में जान आई।